फतेहाबाद जिले के गांव भिरडाना का 21 साल का नौजवान मनीष अब नशे की दलदल से बाहर निकल कर सामान्य जीवन जीने लगा है। अब ट्रक का स्टेयरिंग थाम कर मनीष परिवार का कारोबार संभाल रहा है। मनीष बताता है कि तीन साल पहले एक शादी समारोह में दोस्तों के कहने पर उसने पहली बार शराब पी। कुछ नहीं होता कहकर दोस्तों ने उसे बहका दिया। फिर धीरे-धीरे अफीम, भूकी पोस्त, चिट्टा और फिर मेडिकल नशे तक पहुंच गया। नशे की लत इतनी बढ़ गई कि घर का ट्रांसपोर्ट कारोबार प्रभावित होने लगा। परिवार की आर्थिक स्थिति डगमगाने लगी। मोहल्ले के लोग दूरी बनाने लगे। उसकी जिंदगी निराशा के अंधेरे में डूब चुकी गई।
काउंसलिंग और उपचार से बदला जीवन मनीष बताता है कि गांव भिरडाना में पुलिस का नशा मुक्ति शिविर लगा था। उस दौरान उसकी मां ने उसकी हालत के बारे में नशा मुक्ति टीम के प्रभारी एसआई सुंदर लाल को बताया। सुंदर लाल ने एसपी सिद्धांत जैन को मामले से अवगत करवाया। इसके बाद एसपी की अनुमति मिलने पर टीम ने उसकी काउंसलिंग और उपचार शुरू करवाया। एसआई सुंदरलाल बताते हैं कि जब नशा मुक्ति टीम मनीष से मिली तो उसने भावुक होकर कहा कि मैं किसी लायक नहीं हूं, मुझे तो मर जाना चाहिए। इसके बाद नियमित रूप से उसे दवाइयां दी गई। उसकी काउंसलिंग की गई। लगातार निगरानी और परिवार के सहयोग से मनीष ने धीरे-धीरे नशे को त्याग दिया। मनीष बोला-अब चार ट्रक संभाल रहा मनीष बताता है कि अब वह अपने परिवार के चार ट्रकों का संचालन कर रहा है और खुद भी ड्राइविंग करता है। अब उसमें पूरा आत्मविश्वास आ गया है। मनीष अब दूसरे युवाओं काे भी प्रेरणा दे रहा है। मनीष का कहना है कि पहले उसकी जिंदगी नर्क जैसी बनी हुई थी, लेकिन अब वह शान से जी रहा है।
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