पूर्व कोऑपरेटिव अध्यक्ष संजय कुमार यादव ने बताया कि किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ प्रकृति की मार किसानों को झेलना पड़ा। वहीं दूसरी ओर विभागीय मार झेलना पड़ रहा है।
औरंगाबाद जिले में इस साल धान की बंपर पैदावार के बावजूद एमएसपी पर खरीदारी का लक्ष्य कम निर्धारित किए जाने से किसान और पैक्स अध्यक्ष दोनों परेशान हैं। मामले को लेकर कोऑपरेटिव अध्यक्ष संतोष कुमार सिंह ने एक प्रेस वार्ता आयोजित किया। प्रेस वार्ता के दौरा
कृषि विभाग की ओर से लगभग 11 लाख 60 हजार मीट्रिक टन धान उत्पादन का आकलन प्रस्तुत किया गया है, जबकि जिला सहकारिता पदाधिकारी की ओर से विभाग को मात्र 7 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का आंकड़ा भेजा गया। इसी अंतर का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
संतोष कुमार सिंह ने बताया कि उत्पादन कम दिखाए जाने के कारण विभाग ने धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य घटा दिया। पिछले वर्ष जब करीब 10 लाख मीट्रिक टन धान की उपज हुई थी, तब जिले को 3 लाख मीट्रिक टन से अधिक अधिप्राप्ति लक्ष्य दिया गया था। उस दौरान समितियों की ओर से लगभग 2 लाख 40 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद की गई थी। लेकिन इस वर्ष उत्पादन अधिक होने के बावजूद लक्ष्य घटाकर 1 लाख 70 हजार मीट्रिक टन कर दिया गया है, जिससे सभी किसानों का धान खरीद पाना मुश्किल हो गया है।
कोऑपरेटिव अध्यक्ष संतोष कुमार सिंह
कुल उत्पादन का 14% रखा गया है धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य
उन्होंने कहा कि इस वर्ष कुल उत्पादन का मात्र 14 प्रतिशत ही अधिप्राप्ति लक्ष्य रखा गया है। दूसरी ओर खुले बाजार में मंसूरी धान का भाव काफी कम चल रहा है। किसान चाहते हैं कि वे अपना धान पैक्स में बेचें और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ लें, लेकिन सीमित लक्ष्य के कारण समितियां 14 प्रतिशत से अधिक धान की खरीद नहीं कर पा रही हैं। ऐसी स्थिति में पैक्सों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि किसका धान खरीदा जाए और किसका नहीं।
धान में नहीं ठहर रहा 68% चावल
एक बड़ी समस्या चावल रिकवरी को लेकर भी सामने आ रही है। नियम के अनुसार एक क्विंटल धान के समतुल्य 68 प्रतिशत चावल जमा करना अनिवार्य है, जबकि औरंगाबाद जिले में धान कुटाई के बाद औसतन 60 से 62 प्रतिशत चावल ही निकल पाता है। इस अंतर का बोझ भी समितियों को उठाना पड़ रहा है। कई बार इसके लिए किसानों या मिलरों से अलग से समझौता करना पड़ता है।आंकड़ों की बात करें तो जिले में लक्ष्य के अनुरूप धान की खरीद जारी है। यही कारण है कि जिले में अब तक महज 4884 किसानों से ही धान खरीद की गई है। अभी तक 48,481.053 मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 28 प्रतिशत है। कोऑपरेटिव अध्यक्ष के अनुसार कैश क्रेडिट मिलने के बाद खरीद में तेजी आने की उम्मीद है। अगले दो दिनों में 40 प्रतिशत लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
लक्ष्य बढ़ाकर 3 लाख मीट्रिक टन किए जाने की मांग
कोऑपरेटिव अध्यक्ष ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जिले के लिए कम से कम 3 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया जाए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जिलाधिकारी से बातचीत हुई है, जिन्होंने विभाग से बात कर लक्ष्य बढ़ाने का आश्वासन दिया है। साथ ही सहकारिता विभाग और खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रधान सचिव से भी फोन पर चर्चा हुई है, जहां से भी सकारात्मक संकेत मिले हैं।उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे को लेकर सभी जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है और किसानों के हित में आवाज उठाने की अपील की गई है। संतोष कुमार सिंह ने कहा कि पैक्स अध्यक्षों को किसानों ने चुनकर जिम्मेदारी दी है, इसलिए यह उनकी नैतिक जिम्मेदारी है कि किसानों का धान सरकारी समर्थन मूल्य पर खरीदा जाए। लक्ष्य कम होने के कारण कई अध्यक्षों को किसानों की नाराजगी भी झेलनी पड़ रही है।
दोहरी मार झेल रहे किसान
पूर्व कोऑपरेटिव अध्यक्ष संजय कुमार यादव ने बताया कि किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ प्रकृति की मार किसानों को झेलना पड़ा। वहीं दूसरी ओर विभागीय मार झेलना पड़ रहा है। किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। किसान बिचौलियों के हाथ 17 से 18 सौ रुपए प्रति क्विंटल धान बेचने को मजबूर हैं। अगर लक्ष्य को नहीं बढ़ाया गया तो जिले भर के पैक्स अध्यक्ष सामूहिक रूप से धान अधिप्राप्ति को बंद कर सरकार का विरोध जताएंगे।
डीसीओ ने कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से किया इनकार
इधर इस मामले में जब डीसीओ मनोज कुमार से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उन्होंने कार्यालय कक्ष में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। मीडिया कर्मियों द्वारा लगातार सवाल पूछे जाने के बावजूद उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे कैमरे पर कोई बयान नहीं देंगे।
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