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Success Story: झारखंड की राजधानी रांची के मनातू के रहने वाले ज्योति ने बताया कि उनके पास 2 बीघा जमीन है, जिसमें वह 22 तरह की फसल उगाते हैं. जिसका जैसा सीजन होता है वैसी ही फसलों को उगाते हैं और अपना पूरा समय खेती को ही देते हैं और यही खेती करके आज उनका दो घर है, वह भी दो तल्ले का. उनकी महीने की कमाई लाखों में होती है. अभी सिर्फ 2 डिसमिल जमीन में तो वह पालक उगाये हैं. जहां हर दिन 50 से 60 केजी बाजार में बिक्री हो जाती है. यानी कि हर दिन सिर्फ पालक से ही 2000 रुपये तक की कमाई हो जाती है.
उन्होंने बताया कि उनका खुद का ट्रैक्टर और आधुनिक मशीन भी है. गोबर खाद से लेकर सब कुछ खुद तैयार करते हैं. जहां अक्सर हम लोग किसान को हल्के में लेते हैं. उन्हें लगता है कि डॉक्टर-इंजीनियर बहुत कमाते हैं पर ऐसा नहीं है. अगर खेती भी बढ़िया से करें तो मुनाफा बहुत अच्छा मिलेगा, लेकिन आपको इसके लिए मेहनत भी उतनी ही करनी पड़ेगी.

ज्योति ने आगे बताया कि फिलहाल उनके पास बड़े पैमाने पर मटर की खेती हो रही है. पालक की खेती व टमाटर भी कर रहे हैं. इसके अलावा खीरा रोप दिए हैं. मिर्च, बथुआ, बैंगन, आलू, पत्तागोभी. फूलगोभी, मतलब अभी जो सीजन है उसमें कोई ऐसा सब्जी नहीं है. जो यहां पर नहीं है. लहसुन, प्याज, अदरक सब कुछ ऐसे हर दिन बाजार में 20 से 30 केजी हम बिक्री करते हैं. जहां कई बार सीधा व्यापारी भी खेत में खरीदारी के लिए आ जाते हैं.

किसान ज्योति ने बताया कि जैसे आने वाले सीजन के लिए खीरा से लेकर भिंडी की तैयारी अभी से ही की जा रही है. खेत जोत दिया गया है. उन्होंने बताया कि खेती करना भी आसान काम नहीं है. यहां हर दिन 12 से 14 घंटा देना होता है. खुद से ही खाद तैयार करते हैं. बाहर का कुछ इस्तेमाल नहीं करते हैं. पूरा ऑर्गेनिक खेती होती है. कभी-कभी बाहर से कीटनाशक दवाई लाकर थोड़ा जरूर देते हैं. वह भी एकदम थोड़ा.
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यहां पर हम लोग जो राख होता है. पत्ते वेस्ट जलाकर जो बचता है. उसका राख इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं. किसान ने बताया कि हमारे खेत में ही 3 तरह की खाद बनकर तैयार होती है. एक तो गाय का जो वेस्ट होता है. क्योंकि गाय उनकी ही है. इसलिए घर पर ही गोबर मिल जाता है.

दूसरा बकरी का जो वेस्ट होता है. तीसरा मुर्गी का जो वेस्ट है. इस तरह से वह तीन तहर के खाद खुद तैयार करते हैं. जहां हर दिन उनकी आमदनी 5000 से 6000 रुपये की हो जाती है. उनके इस काम में उनके पापा, मम्मी और भाई खुद बाजार जाकर बिक्री करते हैं. इसी खेती से उन्होंने 2 मकान 2 तल्ले के बनाकर तैयार कर दिए हैं.
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