Faridabad News: फरीदाबाद में रहने वाले एक प्रोफेसर के पास कई अनोखे पौधे हैं. उन्होंने बताया कि मेरे पास कई ऐसे खास पौधे हैं, जैसे अरेबिकम, ग्राफ्टेड कैक्टस, मल्टी ग्राफ्टेड प्लांट और एडेनियम की कई खास वैरायटी. सबसे दिलचस्प बात यह है कि मेरे पास कुछ ऐसे पौधे भी हैं, जिनमें एक ही पौधे पर नौ अलग-अलग रंग के फूल खिलते हैं.
Local18 से बात करते हुए ललित मोहन गोयल ने बताया कि मेरे पास कई ऐसे खास पौधे हैं, जैसे अरेबिकम, ग्राफ्टेड कैक्टस, मल्टी ग्राफ्टेड प्लांट और एडेनियम की कई खास वैरायटी. सबसे दिलचस्प बात यह है कि मेरे पास कुछ ऐसे पौधे भी हैं, जिनमें एक ही पौधे पर नौ अलग-अलग रंग के फूल खिलते हैं. हाल ही में उन्हें एक अनोखे डिजाइन वाले एडेनियम के लिए दूसरा पुरस्कार भी मिला है.
कोरोना के बाद दिया समय
ललित मोहन गोयल ने बताया कि मुझे बचपन से ही पौधे पसंद थे, लेकिन पिछले चार-पांच सालों से मैं काफी एक्टिव होकर इस कार्य को कर रहा हूं. खासकर कोरोना के बाद तो मैंने अपने बगीचे पर ज्यादा समय देना शुरू कर दिया.
ललित मोहन गोयल बताते हैं कि कई पौधे देखने में इतने अलग और अनूठे लगते हैं कि किसी के लिए यकीन करना मुश्किल हो जाए. कुछ पौधे तो कछुए जैसे दिखाई देते हैं. कुछ पौधे शक्ल में गंदे जैसे और कुछ के पत्ते इतने गहरे काले रंग के होते हैं कि हर कोई खींचा चला आता है. ललित मोहन का कहना है कि कैक्टस और एडेनियम रेगिस्तान में उगते हैं और ये अपने अंदर पानी जमा रखते हैं. छोटे-छोटे जीव इन्हीं पौधों से बचा पानी पीकर अपना गुजारा करते हैं.
नर्सरी में भी नहीं मिलेंगे ये खास पौधे
फरीदाबाद के लोग भी अब इन अजब-गजब पौधों के दीवाने हो गए हैं. खासकर कई रंगों वाले कैक्टस और फूलों वाले पौधे सबसे ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं. ललित मोहन गोयल अक्सर बाहर से पौधे मंगवाते हैं और उनके पास ऐसी वैरायटी है कि शायद नॉर्थ इंडिया में और कहीं मिलना मुश्किल हो. ललित मोहन गोयल बताते हैं कि मेरे पास ऐसे भी पौधे हैं, जो आपको कहीं नर्सरी में भी नहीं मिलेंगे.
10 से 5000 रुपए तक के पौधे उपलब्ध
ललित मोहन गोयल बताते हैं कि मेरे पास पौधों की कीमत यहां 10 रुपये के छोटे-छोटे प्लांट्स से लेकर 5,000 रुपए या उससे भी महंगे पौधे मिल जाएंगे. मेरे पर्सनल कलेक्शन में कुछ ऐसे भी प्लांट्स हैं, जिनकी कीमत हजारों से सीधा एक लाख रुपये तक जाती है.
पौधों की देखभाल के बारे में ललित मोहन गोयल कहते हैं कि गमले के लिए 50% मिट्टी लें. बाकी में बजरपुर, यमुना की रेत, कोयला और भुनी हुई ईंट का चूरा मिला दें. गर्मियों में हफ्ते में एक बार थोड़ा पानी काफी है, जबकि सर्दियों में पौधों को धूप में रखना फायदेमंद रहता है. इन्हीं छोटी-छोटी बातों से मेरा हरा-भरा संसार खिल उठा है.
About the Author
आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.
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