इकराम बताते हैं कि वो मुरादाबाद के रहने वाले हैं. बचपन से ही दिल में कुछ अलग करने का सपना था. सिर्फ 8 साल की उम्र में सोच लिया था कि नक्काशी में कुछ बड़ा करना है और उसी समय से उन्होंने काम शुरू कर दिया. आज इकराम 61 साल के हैं और पूरी जिंदगी इसी कला को दे दी है. वो बताते हैं, जुनून इतना था कि कई बार रात में नींद नहीं आती थी, उठकर कागज पर डिजाइन बनाते रहते थे.
बारीक नक्काशी का नायाब नमूना
एक समय ऐसा आया, जब इकराम ने सोचा कि कुछ ऐसा बनाएं, जो पूरी दुनिया में मुरादाबाद का नाम कर दे. इसी सोच के साथ उन्होंने एक खास वाल प्लेट बनाने का फैसला किया. ये प्लेट दिखने में साधारण नहीं, बल्कि बेहद बारीक नक्काशी का नायाब नमूना है. करीब 8 इंच की प्लेट पर इकराम ने 56 हाथी उकेरे हैं. हाथी इतने बारीक बनाए हैं कि ध्यान से देखना पड़ता है. इकराम कहते हैं कि अगर गौर से देखें, तो एक डिजाइन के पीछे दूसरा डिजाइन भी दिखने लगता है.
इतनी है प्लेट की कीमत
ये प्लेट पीतल की है, जिस पर 24 कैरेट सोने की नक्काशी की गई है. इकराम बताते हैं कि जब उन्होंने इस पर काम किया, तब सोना 32 हजार रुपये तोला था और प्लेट में करीब 32 हजार का सोना लगा. ये बात करीब 13 साल पुरानी है. आज वही सोना डेढ़ लाख रुपये का हो गया है, लेकिन प्लेट की कीमत वही रखी है, जो पहले तय की थी. इस एक प्लेट को बनाने में चार साल लगे, वजन लगभग एक किलो कीमत चार लाख रुपये. खास बात यह है कि ये प्लेट गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो चुकी है.
पीएम के प्रोत्साहन से मिल रही प्रेरणा
इकराम हुसैन बताते हैं कि एक बार भारत सरकार ने उन्हें ऑफर दिया था कि अगर वो ये प्लेट ढाई लाख रुपये में देंगे, तो इसे म्यूजियम में रखा जाएगा, लेकिन इकराम ने मना कर दिया और साफ कह दिया कि मेहनत और हुनर की सही कीमत चाहिए, इसलिए प्लेट चार लाख में ही बेचेंगे. वो मानते हैं कि आज भारत की कला और शिल्प को जो इज्जत मिल रही है, उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी भूमिका है. मोदी जी के प्रयासों की वजह से अब भारत की कला और संस्कृति को दुनिया में सम्मान मिलता है.
कला के लिए मिले कई सम्मान
इकराम को उनकी कला के लिए कई बड़े अवॉर्ड मिल चुके हैं. सबसे पहले 2004 में उत्तर प्रदेश सरकार ने स्टेट अवॉर्ड दिया. फिर और ज्यादा मेहनत की. 2010 में भीमराव अंबेडकर अवॉर्ड मिला. 2013 में यूपी सरकार ने राम मनोहर लोहिया विशेष हस्तशिल्प पुरस्कार दिया, जो खुद अखिलेश यादव ने अपने हाथों से दिया था. 2015 में भारत सरकार से नेशनल अवॉर्ड मिला. फिर 2022 में विज्ञान भवन दिल्ली में एक बार फिर नेशनल अवॉर्ड मिला.
राष्ट्रपति से भी मिल चुका है सम्मान
4 जनवरी 2024 को भारत मंडपम में ग्रामीण भारत महोत्सव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके स्टॉल पर पहुंचे थे. प्रधानमंत्री ने उन्हें सराहा. उसी समय इकराम ने वहीं बैठकर एक फ्लावर पॉट पर मोदी और उनकी मां की आकृति बनाई. इकराम कहते हैं कि इतनी चीजें बना चुके हैं कि अब खुद भी याद नहीं रहता. वो किसी की भी तस्वीर नक्काशी में बना सकते हैं और इसी हुनर के लिए राष्ट्रपति से भी सम्मान पा चुके हैं.
बिहार सरकार से मिली सैलरी
2017 में प्रगति मैदान दिल्ली में हुनर आर्ट्स कार्यक्रम के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी उनके काम से प्रभावित हुए. फिर बिहार सरकार ने पटना के उपेंद्र महारथी अनुदान संस्थान में नक्काशी की ट्रेनिंग देने के लिए बुलाया. शुरुआत में 6 महीने के लिए बुलाया था, लेकिन काम इतना पसंद आया कि इकराम वहां 4 साल तक रुके. इस दौरान उन्होंने 550 लोगों को ट्रेनिंग दी और सरकार से 50 हजार रुपये महीना सैलरी मिली.
अलग-अलग डिजाइनों के सामान
इकराम की कोई बड़ी वर्कशॉप नहीं है. वो घर पर ही बच्चों और लोगों को ट्रेनिंग देते हैं. अब तक करीब साढ़े 14 हजार बच्चों को नक्काशी सिखा चुके हैं और 350 लोगों को रोजगार दे रहे हैं. सूरजकुंड मेले में उनके पास सुराही, अस्तावाह, हुक्का, फूलदान जैसे सैकड़ों आइटम हैं. सबसे सस्ती चीज 200 रुपये की कोस्टर है, जिस पर मोर की नक्काशी है. 7 फीट ऊंचा फ्लावर पॉट भी है, जिसकी कीमत 3 लाख रुपये है. ताजमहल की प्रेम कहानी को भी एक फ्लावर पॉट पर उकेरा है, जिसकी कीमत 2 लाख रुपये है.
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