फरीदाबाद का दयालपुर गांव अपनी ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक आस्था के लिए जाना जाता है. मान्यता है कि गुरु हरगोबिंद सिंह यहां आए थे और उनके तीर से मीठे पानी का सोता फूटा था. आज यहां बना गुरुद्वारा आस्था का केंद्र है. इतिहास, भाषा और विकास का अनोखा संगम है दयालपुर.
आज दयालपुर आबादी के मामले में आसपास के गांवों से आगे है. यहां के लोग भी सामाजिक और आर्थिक तौर पर मजबूत माने जाते हैं. लेकिन गांव की असली पहचान है ऐतिहासिक गुरुद्वारा जहां सिखों के छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद सिंह के आने की कहानी जुड़ी है.
62 साल के सेंसर पाल सिरोही बचपन से यहीं रहते आए हैं और बताते हैं कि उनके दादा-परदादा भी इसी मिट्टी में पले-बढ़े. उनके मुताबिक, पुराने समय में गांव में पानी इतना खारा था कि पीना भी मुश्किल था. उसी जमाने में मुगल बादशाह जहांगीर ने 52 राजाओं को कैद में रखा था. कहा जाता है कि गुरु हरगोबिंद सिंह भी उनके साथ बंदी थे. जब जहांगीर बीमार पड़ा, तो किसी ने उसे सलाह दी गुरु को रिहा करो तब ही हालत सुधरेगी. फिर गुरु हरगोबिंद सिंह ने 52 कलियों वाला चोला मंगवाया और सभी राजाओं को साथ लेकर रिहा हुए.
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि उन राजाओं में बल्लभगढ़ के राजा बल्लू भी थे. रिहा होने के बाद गुरु हरगोबिंद सिंह बल्लभगढ़ होते हुए दयालपुर पहुंचे. यहां आकर उन्होंने तीर चलाया और कहते हैं कि उस जगह से मीठे पानी का सोता फूट पड़ा. इससे पहले यहां का पानी पीना मुश्किल था. गांव वाले आज भी इसे चमत्कार और आस्था से जोड़कर याद करते हैं. इसी जगह पर अब ऐतिहासिक गुरुद्वारा है जहां लोग दूर-दूर से सिर झुकाने आते हैं. दयालपुर की एक और खासियत है गांव के लोग कहते हैं यहां चार-पांच भाषाएं बोली जाती हैं हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, पंजाबी, और हरियाणवी. शायद इसी वजह से लोग इसे खिचड़ी भाषा भी कहते हैं. अलग-अलग समुदायों के लोग मिलजुलकर रहते हैं, जिससे गांव में एकता की मिसाल देखने को मिलती है.ट
गांव से तीन विधायक भी निकले
गांव की आबादी करीब 10 से 15 हजार के बीच है. खेती-बाड़ी भी है और नौकरीपेशा लोग भी खूब हैं. देश की सेवा में भी दयालपुर पीछे नहीं रहा यहां के कई लोग सेना में गए हैं और आजादी की लड़ाई में भी हिस्सा लिया था. राजनीति में भी गांव पीछे नहीं यहां से तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं. आज दयालपुर इतिहास, आस्था, भाषा और विकास का बढ़िया मेल है. पुरानी दास्तानें और आज की तरक्की दोनों मिलकर इस गांव को फरीदाबाद का एक खास और गर्व का हिस्सा बनाती हैं.
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Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…और पढ़ें
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