फरीदाबाद की अरावली पहाड़ियाँ सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता ही नहीं, बल्कि अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के लिए भी खास पहचान रखती हैं. इन पहाड़ियों में बसे परसोन मंदिर, पथवारी मंदिर और त्रिवेणी हनुमान मंदिर जैसे प्राचीन स्थल सदियों से आस्था और विश्वास का केंद्र रहे हैं. वहीं, झरना मंदिर अपनी प्राकृतिक छटा, हरियाली और बरसात के मौसम में दिखने वाले मनमोहक दृश्य के कारण श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है.
फरीदाबाद की अरावली पहाड़ियां अपनी अलग पहचान रखती हैं. यहां कई पुराने मंदिर हैं, जिनका इतिहास काफी प्राचीन है. दूर-दूर से श्रद्धालु इन मंदिरों में दर्शन करने आते हैं और पहाड़ियों की खूबसूरती का आनंद लेते हैं.

फरीदाबाद में कई ऐसे मंदिर हैं, जो त्रेता और द्वापर युग से जुड़े हुए माने जाते हैं. लोगों का मानना है कि इन मंदिरों में भगवान और महर्षियों की मौजूदगी का आभास होता है. समय के साथ ये मंदिर आज भी अपनी पवित्रता बनाए हुए हैं.

यह मंदिर लगभग 5,000 साल पुराना बताया जाता है और अंखीर गांव के पास अरावली पहाड़ियों में स्थित है. मान्यता है कि संजीवनी बूटी लाते समय हनुमान जी यहां रुके थे. उनके पदचिन्ह आज भी मंदिर के पास देखे जा सकते हैं.
Add News18 as
Preferred Source on Google

फरीदाबाद का यह 410 साल पुराना पथवारी मंदिर शहर की कुलदेवी के रूप में प्रसिद्ध है. लोग इसे फरीदाबाद का रक्षक मानते हैं और यहां विशेष अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने आते हैं.

पाली गांव की अरावली पहाड़ियों में स्थित यह मंदिर हनुमान जी की 108–111 फीट ऊंची बैठी प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है. इस मंदिर का निर्माण साल 2010 से 2019 के बीच किया गया था, जिसमें राजस्थान के कलाकारों ने अपनी कला से इसे आकार दिया.

यह प्रतिमा रुद्राक्ष की माला और 71 फीट लंबी गदा धारण किए हुए है. यह एशिया की सबसे ऊंची बैठी हनुमान प्रतिमाओं में शामिल है. श्रद्धालु यहां दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

झरना मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है. बरसात के मौसम में यहाँ का दृश्य और भी मनमोहक हो जाता है. आसपास की हरियाली और झरने की ठंडी हवा भक्तों को बेहद आकर्षित करती है.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.