Local18 से बातचीत में फरीदाबाद साइबर सेल में तैनात सब इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह ने साइबर ठगी और बचाव के तरीकों पर कई अहम बातें साझा कीं. लोग उन्हें अब ‘साइबर ताऊ’ के नाम से जानते हैं. उनका कहना है कि जागरूकता ही साइबर क्राइम से बचने का सबसे बड़ा हथियार है. सब इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह बताते हैं कि ज्यादातर ठगी के दो कारण होते हैं.
पहली वजह लालच है, जिसमें लोग जल्दी पैसे कमाने, इनाम जीतने या सस्ते ऑफर के चक्कर में फंस जाते हैं. दूसरी वजह डिजिटल अरेस्ट है, जिसमें ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर डराते हैं और ओटीपी, बैंक डिटेल या पैसे ऐंठ लेते हैं. साइबर ताऊ साफ कहते हैं कि कोई भी सरकारी अधिकारी फोन पर ओटीपी या पैसे नहीं मांगता. अगर ऐसा हो तो तुरंत सतर्क हो जाएं.
मौके के हिसाब से बदलती ठगी की तरकीबें
सब इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह बताते हैं कि साइबर ठगी का तरीका मौसम और मौके के अनुसार बदलता रहता है. शादी के सीजन में डिजिटल शादी के कार्ड के जरिए फर्जी लिंक भेजे जाते हैं, जिसे लोग कार्ड समझकर खोल लेते हैं और उनका मोबाइल या बैंक अकाउंट ठगों के कब्जे में चला जाता है. इसी तरह कभी नौकरी के नाम पर, कभी लोन के नाम पर और कभी निवेश के नाम पर ठगी की जाती है.
सिम कार्ड और आधार कार्ड से जुड़े खतरे
साइबर ताऊ ने सिम कार्ड से जुड़े खतरों की ओर भी ध्यान दिलाया. कई बार लोगों के आधार कार्ड पर उनकी जानकारी के बिना कई सिम कार्ड एक्टिव हो जाते हैं, जिसका इस्तेमाल ठगी में किया जाता है. उन्होंने बताया कि यह पता करने के लिए कि आपके आधार कार्ड पर कितनी सिम सक्रिय हैं, गूगल पर ‘संचार साथी’ सर्च करें और वेबसाइट पर अपना मोबाइल नंबर व ओटीपी डालें. इसके बाद स्क्रीन पर दिख जाएगा कि आपकी आईडी पर कितनी सिम एक्टिव हैं. अगर कोई नंबर आपका नहीं है तो ‘नॉट माय नंबर’ पर क्लिक करके रिपोर्ट करें. ऐसा करने पर वह सिम बंद हो जाती है. उन्होंने यह भी बताया कि कई बार लोग आधार कार्ड से अंगूठा लगवाते समय धोखे का शिकार हो जाते हैं. एक सिम आपको दे दी जाती है और बाकी सिम किसी और को बेच दी जाती हैं, जिनका इस्तेमाल बाद में साइबर ठगी में होता है. इसलिए किसी भी जगह आधार कार्ड या अंगूठा लगाने से पहले पूरी सावधानी बरतनी चाहिए.
ठगी का शिकार होने पर क्या करें
सब इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो घबराने की जरूरत नहीं है. तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें. अगर वहां संपर्क न हो पाए तो cybercrime.gov.in वेबसाइट पर शिकायत दर्ज करें. समय पर शिकायत करने से कई बार ठगी की रकम बीच में ही रोक ली जाती है.
जागरूकता और सुरक्षा ही बचाव है
फरीदाबाद में रोज साइबर ठगी के इतने मामले सामने आ रहे हैं कि गिनती करना मुश्किल है. इसी वजह से उनकी टीम स्कूलों, कॉलेजों और अलग-अलग मंचों पर जाकर लोगों को जागरूक करती रहती है. टीवी चैनलों और अन्य माध्यमों से भी लगातार संदेश पहुंचाया जा रहा है, ताकि कोई भी साइबर ठगी का शिकार न बने. साइबर ताऊ का साफ संदेश है कि सावधानी ही बचाव है, जागरूक रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे.
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