वैलेंटाइन डे पर हुआ घाटा हुआ
योगेश जो पिछले 20 से 22 साल से फूलों का काम कर रहे हैं Local18 से बात करते हुए बताते हैं कि पूरा परिवार इस दुकान में लगा रहता है. हम चार भाई हैं स्टाफ मिलाकर 6 से 7 लोग काम करते हैं. खुद का खेत नहीं है दिल्ली की गाज़ीपुर मंडी से फूल लाते हैं फिर यहां बेचते हैं. पिछले साल वैलेंटाइन पर तो धड़ल्ले से बिक्री हुई थी, लेकिन इस बार तो हालत ये है कि माल का पेमेंट तक नहीं निकल पाया… घाटा हो गया.
कंपटीशन बहुत बढ़ गया है
अब उम्मीद शादियों के सीजन से है मगर वहां भी आसानी नहीं बची. योगेश कहते हैं अब तो हर दूसरा आदमी फूलों का काम करने लग गया. काम में कंपटीशन बहुत बढ़ गया है. हमारा काम पुराना है इसलिए पुराने ग्राहक टिके हुए हैं… मोहना, दयालपुर, तिगांव, मुजेड़ी, गोच्छी, पलवल तक से लोग आते हैं.
शादी-ब्याह में सजावट के अलग-अलग रेट
शादी-ब्याह में सजावट के अलग-अलग रेट हैं. गाड़ी सजाने का काम 1100 रुपये से शुरू होकर 50,000 रुपये तक जाता है. बड़े पैकेज में एक फूल की कीमत 200 रुपये तक हो जाती है. वरमाला 800 से लेकर 30,000 रुपये तक की बिकती है देसी गुलाब और सफेद फूल सबसे ज्यादा चलते हैं.
वैलेंटाइन डे की कमजोर बिक्री का सीधा असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा है. जो माल लेकर आए थे वो घाटे में चला गया. स्टाफ की सैलरी निकालना मुश्किल हो गया. इस महीने बस होली तक 8 से 10 ही शादियां हैं अब उन्हीं से उम्मीद है कि नुकसान कुछ कम हो जाए.
उम्मीदें आने वाले शादी सीजन पर टिकी हैं
सीजन खत्म होते ही मुश्किलें और बढ़ जाती हैं. शादी वाला काम खत्म होते ही कई दिन खाली बैठना पड़ता है. फिर बस रोज के गुलदस्ते और फूल बेचकर ही गुजारा चलता है. हमारा 15 लोगों का परिवार है खर्चे बहुत हैं. दुकान का किराया भी है बड़े भैया सप्लायर का काम संभालते हैं.
बल्लभगढ़ के फूल बाजार की ये हालत साफ दिखाती है कि त्योहारों और खास दिनों पर टिकी ये रोजी-रोटी अब पहले जितनी भरोसेमंद नहीं रही. इस बार प्यार के दिन ने खुशबू से ज्यादा चिंता दे दी और अब सबकी उम्मीदें आने वाले शादी सीजन पर टिकी हैं… क्योंकि वही है नुकसान से उबरने की आखिरी उम्मीद.
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