फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले में झूला गिरने की भयानक घटना में अबरार अली ने अपनी जान की परवाह किए बिना सात लोगों की जान बचाई. राज्य स्तर के बॉक्सर अबरार की बहादुरी ने न सिर्फ लोगों की जानें बचाईं, बल्कि यह दिखाया कि मुश्किल समय में इंसान अपनी हिम्मत और फुर्ती से क्या कर सकता है. हादसे में एक पुलिस इंस्पेक्टर की मौत हुई, लेकिन अबरार की शौर्य कहानी इंसानियत और साहस की मिसाल बन गई.
Local18 से बात करते हुए अबरार ने बताया कि उनकी बच्चों की गेम की दुकान थी. जैसे ही हादसा हुआ, वे भागते हुए अपनी दुकान से निकलकर मौके पर पहुंचे. उस समय झूला करीब तीन-चार फुट ऊंची रेलिंग पर अटका हुआ था, लेकिन अबरार का बस एक ही मकसद था—लोगों की जान बचाना. उन्होंने बिना कुछ सोचे रेलिंग फांदी और ऊपर चढ़ गए. वहां पहुंचकर उन्होंने एक-एक करके सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला. इसके बाद उन्होंने बाकी फंसी महिलाओं को भी खींचने का प्रयास किया. आखिर में, जब वे एक महिला को बचा रहे थे, तभी झूले का दूसरा हिस्सा गिर गया. इस गिरावट में पुलिस कर्मी घायल हो गए और इंस्पेक्टर जगदीश की मौत हो गई. अबरार बताते हैं कि जगदीश जी बहुत अच्छे इंसान थे और अक्सर उनके हाल-चाल पूछते थे. उनके जाने का बहुत दुख है.
अबरार ने हादसे के हर पल की तस्वीरें भी खींची
उन्होंने कहा कि जब झूला पहली बार गिरा, तो उन्होंने बिना देर किए ऊपर चढ़ना शुरू किया. अगर वे एक सेकंड भी रुकते, तो सात लोगों की जान नहीं बचती. दूसरी बार झूला गिरने पर वे भी घायल हो गए, हादसे के समय झूले पर लगभग 25 से 26 लोग थे. एक तरफ 12 से 13 लोग और बाकी दूसरी तरफ वेंडर की लापरवाही इस हादसे में साफ झलक रही थी. अबरार खुद राज्य स्तर के बॉक्सर हैं, वे कहते हैं कि लोग घबराकर चिल्ला रहे थे और किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए. उन्होंने देखा कि लोग फंसे हुए हैं, और बिना सोचे-समझे उन्हें बचाने कूद पड़े. सात लोगों को उन्होंने बिना किसी गंभीर चोट के बाहर निकाल लिया. हालांकि, खुद उनके पैर में चोट लगी, लेकिन हिम्मत नहीं हारी.
अबरार की हिम्मत ने न सिर्फ लोगों की जान बचाई, बल्कि यह भी दिखा दिया कि इंसान मुसीबत में कितना मजबूत हो सकता है. उनकी फुर्ती और सोच ने दर्जनों लोगों की ज़िंदगी बचा दी. हादसे के समय एंबुलेंस और पुलिस की तेज़ी भी बहुत काम आई. इस सबने हमें याद दिलाया कि सुरक्षा और जिम्मेदारी में चूक कितनी भारी पड़ सकती है. सूरजकुंड मेला रंग-बिरंगे उत्सवों के लिए जाना जाता है, लेकिन इस हादसे ने यह सिखाया कि जश्न के साथ-साथ सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है. अबरार अली की बहादुरी हर उस इंसान के लिए मिसाल है जो मुश्किल घड़ी में सही कदम उठाने से पीछे नहीं हटता. इस एक हादसे ने सभी को दर्द तो दिया, लेकिन अबरार जैसे बहादुर ने यह भी साबित कर दिया कि इंसानियत और हिम्मत की कोई हद नहीं होती.
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