अल्मोड़ा में कुमाऊं के उदित नारायण के नाम से प्रसिद्ध लोक गायक दीवान सिंह कनवाल अब हमारे बीच नहीं रहे। वह लंबे समय से बीमार थे। उनके निधन से लोकसंगीत जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। मुख्यमंत्री धामी ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है।
कुमाऊंनी लोक गायक दीवान सिंह कनवाल ने अल्मोड़ा के खत्याड़ी स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। कनवाल ने अपनी मधुर आवाज और लोकधुनों को सांस्कृतिक नगरी को नई पहचान दिया। बच्चे और बुजुर्गों तक उनके आवाज के मुरीद थे। वह गीतों से पहाड़ की संस्कृति, परंपराओं और लोकजीवन को जीवंत रूप देते थे। उनके गीत आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।
लोकसंगीत के साथ-साथ दीवान सिंह कनवाल एक सशक्त रंगकर्मी भी थे। उन्होंने अल्मोड़ा के प्रसिद्ध हुक्का क्लब की रामलीला में अपनी कलाकारी का हुनर दिखाया। उनके किरदारों आज भी अल्मोड़ा निवासियों के दिलों में बसे हैं। वह मंच पर प्रदर्शन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते थे।
अब कनवाल हमारे बीच नहीं रहे। उनके गीत युवाओं को याद आती रहेगी। उनके निधन की खबर मिलते ही अल्मोड़ा के लोगों में गहरा दुख और स्तब्ध का माहौल है। सांस्कृतिक, सामाजिक और कलात्मक जगत से जुड़े लोग उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देने उनके घर पहुंच रहे हैं।
दीवान सिंह कनवाल जिला सहकारी बैंक अल्मोड़ा से सीनियर ब्रांच मैनेजर पद से वर्ष 2021 में सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह कुमाऊंनी लोक गीतों के सृजन और संरक्षण के कार्य में समर्पित कर दिया था। बताया जा रहा है कि उनका अंतिम संस्कार अल्मोड़ा के बेतालेश्वर घाट में किया जाएगा।
लोक कलाकार दीवान कनवाल के निधन पर मुख्यमंत्री ने जताया शोक
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रसिद्ध लोक कलाकार श्री दीवान कनवाल के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री दीवान कनवाल ने उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक संस्कृति और लोक संगीत को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि दीवान कनवाल का निधन उत्तराखण्ड की लोक कला और सांस्कृतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों एवं उनके प्रशंसकों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की कामना की है।
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