भास्कर एक्सपर्ट टीबी विभाग के कर्मियों ने लापरवाही से लगभग 20 हजार आयरन या फॉलिक एसिड के टैबलेट जला दिए। ये दवाएं एक्सपायर हो गई थीं। सीएस कार्यालय के पीछे जली हुई दवाओं के रैपर पर एक्सपायरी डेट 2020 निर्धारित है, ऐसे में उसे नियमानुसार 2020-21 के बीच कमेटी गठित कर निस्तारण करना था। लेकिन जिला में अब तक निस्तारण कमेटी ही गठित नहीं हो पाई है। एक्सपायरी दवाओं को किसी गड्ढे में डालकर जलाना था और मिट्टी से ढंकना था। चूंकि किसी भी तरह की दवाओं को खुले में जलाने का कोई प्रावधान नहीं है, इससे पर्यावरण और सदर अस्तपाल में भर्ती मरीजों को नुकसान हो सकात है। फिर भी यहां नियमों का उल्लंघन खुलेआम किया जाता है। लेकिन इस ओर देखने वाला कोई नहीं है। जिससे लापरवाही उजागर हुई है। दोषी कर्मियों को निलंबित किया जाएगा : सीएस टीबी विभाग की लापरवाही के कारण 20 हजार से अधिक आयरन और फॉलिक एसिड की टेबलेट जला दिए गए। इसकी जानकारी होने पर कई जरूरतमंद लोगों ने कहा कि ऐसी लापरवाही के खिलाफ जांच होनी चाहिए। जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण हुई घटनाओं के खिलाफ दोषी पाए जाने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी होनी चाहिए। इस मामले में पारदर्शिता बरतते हुए जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक होनी चाहिए। दवाओं को खुले में जलाने से उससे निकलने वाला धुआं स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हानिकारक है। इससे सांस की बीमारी सहित आंखों में जलन हो सकती है। साथ ही पशु पक्षियों को भी हानि पहुंचती है। एक्सपायर दवाओं के निस्तारण के लिए नियमों का पालन जरूरी है। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। डॉ. एचके मिश्रा, पूर्व एसीएमओ, बोकारो। जरूरतमंद को नहीं मिली, जला दी 20 हजार टैबलेट
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.