Last Updated:
उपले गाय के गोबर से बनाए जाते हैं, जो अपने आप में एक बेहतरीन जैविक खाद है. इसमें प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो पौधों की वृद्धि के लिए जरूरी हैं. यह मिट्टी की संरचना को सुधारता है और सूक्ष्म जीवों की सक्रियता बढ़ाता है
घर की बालकनी या आंगन में लगे पौधे जब मुरझाने लगते हैं या उनकी ग्रोथ रुक जाती है, तो अक्सर लोग महंगे केमिकल फर्टिलाइजर की ओर रुख करते हैं. जबकि एक सस्ता और पूरी तरह प्राकृतिक उपाय आपके आसपास ही मौजूद है—उपलों (गोबर के कंडों) से बनी खाद. यह जैविक खाद मिट्टी की सेहत सुधारती है और पौधों को दोबारा हरा-भरा बनाने में मदद करती है. खास बात यह है कि यह पर्यावरण के अनुकूल है और लंबे समय तक मिट्टी की उर्वरता बनाए रखती है.

उपले गाय के गोबर से बनाए जाते हैं, जो अपने आप में एक बेहतरीन जैविक खाद है. इसमें प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो पौधों की वृद्धि के लिए जरूरी हैं. यह मिट्टी की संरचना को सुधारता है और सूक्ष्म जीवों की सक्रियता बढ़ाता है. इससे जड़ों को बेहतर पोषण मिलता है और पौधे मजबूत बनते हैं.

किसान ओंकारनाथ बताते है कि वो अपनी सारी खेती में जैविक तकनीक अपनाते है. इसके लिए वो उपलों से भी खाद तैयार करते है. उन्होंने कहा कि सबसे पहले सूखे उपलों को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ लें. इन टुकड़ों को किसी बाल्टी या बड़े बर्तन में डालें. अब इसमें इतना पानी मिलाएं कि उपले अच्छी तरह भीग जाएं. बर्तन को ढककर 2 से 3 दिन के लिए छोड़ दें. इस दौरान उपले नरम होकर घुलने लगेंगे और पोषक तत्व पानी में मिल जाएंगे.
Add News18 as
Preferred Source on Google

जब उपले पूरी तरह नरम होकर घुलनुमा हो जाएं और पानी का रंग गहरा हो जाए, तो समझ लें कि खाद इस्तेमाल के लिए तैयार है. यदि हल्की सी सड़ी हुई गंध आए तो यह सामान्य है. अब इसे छानकर या सीधे मिट्टी में मिलाने के लिए उपयोग किया जा सकता है.

खाद डालने से पहले गमले या क्यारी की मिट्टी की हल्की गुड़ाई कर लें, ताकि मिट्टी ढीली हो जाए. इसके बाद तैयार खाद को ऊपर से मिट्टी में मिलाएं. ध्यान रखें कि बहुत अधिक मात्रा में खाद न डालें, क्योंकि ज्यादा खाद से जड़ों पर असर पड़ सकता है. संतुलित मात्रा ही पौधों के लिए लाभकारी होती है.

आगे कहा कि यदि खाद डालते समय मिट्टी पहले से गीली है, तो तुरंत पानी न दें. गमले को ऐसी जगह रखें जहां 3 से 4 दिन तक अच्छी धूप मिल सके. धूप से खाद के पोषक तत्व सक्रिय होते हैं और मिट्टी में बेहतर तरीके से समाहित हो जाते हैं.

आगे कहा कि उपलों की खाद का असर कुछ ही दिनों में नजर आने लगता है. मिट्टी में नमी बनी रहती है, जड़ों को पोषण मिलता है और पत्तियां हरी-भरी दिखने लगती हैं. नियमित उपयोग से पौधों की ग्रोथ बेहतर होती है और फूल-फल भी अधिक आते हैं.

उन्होंने बताया कि आज के दौर में जहां केमिकल खाद के दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं, वहां उपलों की खाद एक सुरक्षित और किफायती विकल्प है. यह आसानी से उपलब्ध होती है और हर तरह के घरेलू पौधों के लिए फायदेमंद मानी जाती है. अगर आप भी अपने पौधों को प्राकृतिक तरीके से स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो इस उपाय को जरूर अपनाएं.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.