लंबे इंतजार के बाद वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में अगले सत्र से एमएड की पढ़ाई शुरू होगी. यूनिवर्सिटी ने 50 सीटों पर नामांकन प्रस्ताव भेजा है. लेकिन कोर्स कि शुरुआत से पहले बड़ी चुनौती कर्मचारी की नियुक्ति और शिक्षकों को बहाल करना है.
एमएड की पढ़ाई के लिए तैयारी शुरू
एमएड की पढ़ाई के लिए बाहर से योग्य शिक्षकों को बुलाया जाएगा. वर्तमान में वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के केवल दो कॉलेजों में नामांकन के लिए शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है. हालांकि, अभी तक वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के शिक्षा (बीएड) विभाग में सिर्फ बैचलर ऑफ एजुकेशन (बीएड) की पढ़ाई होती है. विश्वविद्यालय के बीएड विभाग के निदेशक डा. राजेश वर्मा ने बताया कि विभाग में एमएड की पढ़ाई शुरू हो इसके लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है.एमएड की पढ़ाई के लिए बाहर से योग्य शिक्षकों को बुलाया जाएगा.
बीएड के 20 कॉलेज, नहीं मिल रहा एमएड का फायदा
वर्तमान में वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के केवल दो कॉलेजों में एमएड की पढ़ाई होती है. इनमें भोजपुर जिला में माता मंझारो अजय दयाल सिंह टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, दुलौर और कैमूर जिला में एमपी कॉलेज मोहनिया है. दोनों जगह 60-60 सीट पर नामांकित विद्यार्थियों की पढ़ाई होती है. वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय अंतर्गत 20 बीएड कॉलेज हैं. लेकिन, एमएड के पाठ्यक्रम में पर्याप्त सीट नहीं होने की वजह से मास्टर की डिग्री लेने से वंचित हो जाते हैं. वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के शिक्षा (बीएड) विभाग में एमएड की पढ़ाई शुरू होने से इसका लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा.
कर्मचारी और शिक्षकों की होगी जरूरत
एमएड की पढ़ाई शुरू करने के लिए वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा. वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के शिक्षा (बीएड) विभाग में एमएड की पढ़ाई शुरू करने के लिए शिक्षकों-कर्मचारियों की नियुक्ति और आधारभूत संरचनाओं को विकसित करना बड़ी चुनौती रहेगी. क्योंकि वर्तमान बीएड विभाग में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के मानक अनुसार शिक्षक नहीं है. अभी बीएड विभाग में ही 15 शिक्षक और पांच कर्मचारी की आवश्यकता है. जिसे अभी तक पूरा नहीं किया गया है. इसके लिए कई बार बीएड विभाग के छात्र-छात्राएं शिक्षकों कमी को लेकर आंदोलन भी कर चुके हैं. बिहार सरकार में प्रधानाध्यापक, प्रधान शिक्षक और विशिष्ट शिक्षक जैसे पदों पर इस वर्ष बहाली होने की वजह विद्यार्थियों की मांग काफी बढ़ी है.
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