Patna Women’s College Building: पटना विमेंस कॉलेज की ऐतिहासिक बिल्डिंग का निर्माण 1940 के दशक में महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था. 1945 में तत्कालीन गवर्नर Lord Rutherford ने बेली रोड पर स्थायी परिसर के लिए जमीन दी, ताकि इसका भवन पास स्थित पटना हाई कोर्ट की भव्य वास्तुकला से मेल खा सके.
पटना शहर के बेस्ट शैक्षणिक स्थलों में गिनी जाने वाली पटना विमेंस कॉलेज की ऐतिहासिक इमारत न सिर्फ शिक्षा का केंद्र है. बल्कि आर्किटेक्चर और धरोहर का भी अनूठा उदाहरण मानी जाती है. राजधानी के पॉश इलाके में स्थित यह भवन अपनी भव्यता, बैलेंस डिजाइन और सांस्कृतिक महत्व के कारण वर्षों से लोगों का ध्यान आकर्षित करता रहा है. शहर से गुजरने वाला कोई भी व्यक्ति इसकी किले जैसी स्ट्रक्चर और ऊंचे मेहराबदार प्रवेश द्वार को देखकर ठहरने पर मजबूर हो जाता है. फोन निकाल फोटो लेना नहीं भूलता है.

जब बिहार महिलाओं की उच्च शिक्षा के लिए बहुत कम ऑप्शंस थे तो अंग्रेजो ने 1940 में इस कॉलेज की स्थापना की थी. इसे स्थापित करने का श्रेय Bishop B. J. Sullivan और Mother M. Josephine को जाता है. शुरुआती वर्षों में कॉलेज और हॉस्टल बिशप के निजी आवास से संचालित होते थे. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह संस्थान बेहद सीमित<br />संसाधनों के बीच शुरू हुआ था. धीरे धीरे लड़कियों की संख्या बढ़ी तो बड़ी जगह की जरूरत महसूस हुई.

तब तत्कालीन गवर्नर लार्ड रदरफोर्ड ने 1945 में इस संस्थान के विस्तार और भवन निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराई. यह जमीन शहर की प्रमुख सड़क बेली रोड यानी नेहरू पथ पर दी गई. इस सड़क को कई मायनों में खास माना जाता है. इसके बाद भवन का निर्माण पूरा हुआ और तीन वर्षों बाद यानी 1948 में कॉलेज नए परिसर में शिफ्ट हो गया. यह पटना हाई कोर्ट के बिल्कुल सामने है.
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इस भवन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी मिक्सड वास्तुकला शैली है. इसमें गोथिक, नॉर्मन, मुगल और पारंपरिक भारतीय आर्किटेक्चर का अद्भुत मेल दिखाई देता है. ऊंचे नुकीले मेहराब, किले जैसे किनारे, लंबी खिड़कियां और सजावटी पिलर्स इसे किसी ऐतिहासिक राजमहल या यूरोपीय किले जैसा रूप देते हैं. यही कारण है कि वास्तुकला के विद्यार्थी और इतिहासकार इस इमारत को अध्ययन का महत्वपूर्ण उदाहरण मानते हैं. इसके किले जैसी दीवारें बेहद खास लगती है.

स्ट्रक्चरल एंगल से यह भवन सिमेट्रिकल डिजाइन पर आधारित है. इससे इसका लुक बैलेंस औरअत्यंत आकर्षक निखरता है. ऊंची छतें और चौड़े बरामदे पनेचुरल वेंटिलेशन का काम करते हैं. इससे उस जमाने में भी अंदर का तापमान संतुलित रहता था. वास्तु एक्सपर्ट का मानना है कि यह डिजाइन उस दौर की इको फ्रेंडली निर्माण शैली को दर्शाता है.

इस बिल्डिंग का लोकेशन भी इसकी पहचान को विशेष बनाती है. इसके सामने स्थित पटना हाई कोर्ट के कारण यह इलाका प्रशासनिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है. यही वजह है कि कॉलेज भवन को उस समय विशेष रूप से भव्य बनाया गया, ताकि आसपास की प्रतिष्ठित इमारतों के साथ इसका वास्तु लेवल मेल खा सके.

इस भव्य कॉलेज भवन का डिजाइन फादर गेरहार्ट और फादर एफ लोएश ने डिजाइन किया था. 29 एकड़ से अधिक भूमि के हरे-भरे परिसर में मुख्य कॉलेज भवन, पुस्तकालय ब्लॉक, विज्ञान ब्लॉक, व्यावसायिक ब्लॉक, प्रशासनिक ब्लॉक सहित कई चीजें मौजूद है. भवन के आस पास बना गार्डन भी अपने आप में खास है. यहां सेंट्रल एक्सिस गार्डन यूरोपीय संस्थागत वास्तुकला की पहचान है.
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