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JEE Tips: जेईई मेंस में कम अंक आए हैं तो परेशान ना हों. अप्रैल सत्र के लिए एप्लीकेशन आधारित पढ़ाई करें. सही रणनीति बनाएं और निरंतर अभ्यास करें. आईआईटी गुरु के नाम से फेमस पलामू के इंजीनियर विनय मेहता ने परीक्षा में सफलता हासिल करने के जरूरी टिप्स शेयर किए.
पलामू. जेईई मेंस जनवरी सत्र के नतीजे आने के बाद कई छात्र-छात्राएं कम अंकों को लेकर निराश हैं. लेकिन अब घबराने की जरूरत नहीं है. इसके लिए छात्रों को खास प्लानिंग और सही रणनीति की जरूरत है. आसान टिप्स और ट्रिक्स की मदद से आगे बढ़ा जा सकता है.
पलामू की शैक्षणिक संस्था डेडीकेटेड एकेडमी ने इस संबंध में जानकारी दी है. एकेडमी के प्रोप्राइटर और आईआईटी गुरु के नाम से प्रसिद्ध इंजीनियर विनय मेहता ने बताया कि खास तौर पर अप्रैल सत्र की परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को अभी से संगठित तैयारी करनी चाहिए.
रणनीति के साथ करें तैयारी
इंजीनियर विनय मेहता ने कहा कि जेईई मेंस 300 अंकों की परीक्षा है, लेकिन इसमें प्रतिशत और पर्सेंटाइल का अंतर समझना जरूरी है. पर्सेंटाइल टॉप स्कोर के आधार पर तय होता है, इसलिए छात्रों को रणनीति के साथ तैयारी करनी चाहिए.
उनके अनुसार यदि छात्र फिजिक्स और केमिस्ट्री में लगभग 50-50 प्रतिशत अंक तथा गणित में 30 प्रतिशत तक अंक लाते हैं, तो भी एनआईटी जैसी संस्थाओं का रास्ता खुल सकता है. 170 से 180 अंक कई बार 99 पर्सेंटाइल तक पहुंचा देते हैं, जबकि 120 से 130 अंक 95 पर्सेंटाइल के आसपास ले जाते हैं. यदि छात्र 65 से 70 प्रतिशत प्रश्न सही कर लेते हैं, तो 99 पर्सेंटाइल से अधिक प्राप्त करना संभव है.
एप्लीकेशन आधारित पढ़ाई जरूरी
विनय मेहता का कहना है कि अब केवल थ्योरी दोहराने के बजाय एप्लीकेशन आधारित पढ़ाई जरूरी है. पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को हल करने पर विशेष जोर दें. इससे सवालों का अनुभव तो होगा ही साथ ही स्पीड भी बढ़ेगी. छात्रों को सलाह है कि वे 3 घंटे की क्लास के अलावा रोजाना कम से कम 6 घंटे घर पर अभ्यास करें. सेल्फ स्टडी की बात कहीं और नहीं आती है. सही रणनीति, अनुशासन और निरंतर अभ्यास से अप्रैल सत्र में बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है. कम अंक अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत का अवसर हैं.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें
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