गोंड आदिवासी समाज में शिक्षा,स्वास्थ्य और संवैधानिक अधिकारों को लेकर जागरूकता लगातार मजबूत हो रही है। समाज के बुजुर्गों से लेकर महिलाएं,युवा और बच्चे तक शिक्षा को प्राथमिकता देने,स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने को लेकर सजग नजर आए। समाज के लोगों को बच्चों की नियमित पढ़ाई,बालिकाओं की उच्च शिक्षा,स्वच्छता अपनाने,नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़ने का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा ही समाज के विकास की सबसे मजबूत कड़ी है,जबकि बेहतर स्वास्थ्य से ही समग्र उन्नति संभव है। इसके साथ ही समाज की पारंपरिक संस्कृति,रीति–रिवाजो ं और पहचान को संरक्षित रखने पर जोर दिया गया। कहा गया कि आधुनिकता के इस दौर में अपनी सांस्कृतिक जड़ों को बचाना आवश्यक है,ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी पहचान न खोए। सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं आवास,पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, छात्रवृत्ति और स्वरोजगार की जानकारी भी समाज के लोगों को दी गई।
लोगों से अपील की गई कि वे योजनाओं की सही जानकारी लेकर पात्रता के अनुसार आवेदन करें,ताकि किसी भी लाभ से वंचित न रहें। पेसा कानून के तहत ग्राम सभा को मिले अधिकारों,स्थानीय स्वशासन,जल–जंगल–जमीन की सुरक्षा और आदिवासी हितों से जुड़े प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी दी गई। मतदाता सूची में नाम जुड़वाने,संशोधन कराने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की गई। ठंड के मौसम को देखते हुए बुजुर्गों और महिलाओं के बीच कंबल का वितरण किया गया,जिससे जरूरतमंदों को राहत मिली। इस पहल को समाज के लोगों ने सराहा। इन सभी सामाजिक विषयों को लेकर यह चर्चा झारखंड प्रदेश गोंड आदिवासी महासभा के तत्वावधान में कोचेडेगा प्रखंड अंतर्गत मांझीटोली में आयोजित एक सामाजिक बैठक के दौरान की गई।
लोगों को अपनी सभ्यता और संस्कृति को संरक्षित करने की जरूरत:विमलामहासभा अध्यक्ष विमला प्रधान ने कहा कि गोंड समाज को शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होकर संगठित रूप से आगे बढ़ने की जरूरत है। पेसा कानून के तहत मिले अधिकारों की जानकारी से ही समाज अपने संस्कृति,परम्परा और सभ्यता की प्रभावी सुरक्षा कर सकता है। शिक्षा के प्रति भी जागरूकता जरूरी है।
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