हजारीबाग के पूर्व नक्सल प्रभावित अडरा पंचायत के धैर्य राज ने JEE Main 2026 में 99.68 परसेंटाइल लाकर जिले में शीर्ष स्थान पाया है. जिस गांव में कभी नक्सलियों की जन अदालत लगती थी, वहां से निकली यह सफलता शिक्षा की जीत है. धैर्य ने बिना बड़े शहरों में जाए, कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया.
99.68 परसेंटाइल अंक हासिल
इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल अडरा पंचायत के छात्र धैर्य राज बने हैं. उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा आयोजित संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई-मेन) जनवरी सेशन 2026 में 99.68 परसेंटाइल अंक हासिल कर पूरे जिले में पहला स्थान प्राप्त किया है. उनकी इस उपलब्धि से न केवल परिवार बल्कि पूरा गांव और जिला गर्व महसूस कर रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि जिस क्षेत्र को कभी नक्सल प्रभावित कहा जाता था, वहां से इस तरह की शैक्षणिक सफलता निकलना पूरे समाज के लिए प्रेरणा है.
लोकल 18 से बातचीत में धैर्य ने बताया कि उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव से ही हुई. परिवार में पढ़ाई का अच्छा माहौल रहा, जिसने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. उनके बड़े भाई एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि बहन इंजीनियरिंग कर रही हैं. भाई-बहन को पढ़ाई करते देख उनके मन में भी इंजीनियर बनने का सपना जगा.
सोशल मीडिया से बनाई दूरी
उन्होंने आगे बताया कि पिछले दो वर्षों तक उन्होंने लगातार मेहनत की, सोशल मीडिया से दूरी बनाई और पूरी लगन के साथ तैयारी में जुटे रहे. खास बात यह रही कि उन्होंने कोटा या दिल्ली जैसे बड़े शहरों में कोचिंग नहीं ली, बल्कि हजारीबाग में रहकर सेल्फ-स्टडी और स्थानीय कोचिंग संस्थान की मदद से यह सफलता हासिल की. नए छात्रों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो छोटे शहर से भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है.
धैर्य के पिता जानकी रविदास पेशे से सरकारी शिक्षक हैं, बातचीत के दौरान धैर्य के पिता ने बताया कि एक समय उनका पूरा पंचायत नक्सलियों के कारण काफी डर के साए में रहता था. नक्सलियों ने कभी उनके भी खिलाफ भी जन अदालत लगाई थी, लेकिन सबूत नहीं मिलने पर उन्हें छोड़ दिया गया था. लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. गांव के कई बच्चे अब इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं, जो बेहद सुकून देने वाला है. उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह ताकत है, जो समाज को सही दिशा देती है और नई पीढ़ी को हिंसा के रास्ते से दूर रखती है.
बदलाव की कहानी
धैर्य राज की सफलता केवल एक छात्र की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उस सकारात्मक बदलाव की कहानी है, जहां कभी डर और असुरक्षा का माहौल था और आज शिक्षा उम्मीद की नई रोशनी बनकर उभर रही है. यह उपलब्धि साबित करती है कि जब अवसर और मेहनत साथ मिलते हैं, तो कोई भी क्षेत्र पिछड़ा नहीं रह जाता.
About the Author
मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
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