प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने PACL लिमिटेड (पर्ल ग्रुप) और इससे जुड़ी कंपनियों से जुड़े बड़े पैमाने पर वित्तीय घोटाले के मामले में एक बड़ा एक्शन लिया है। ED के दिल्ली जोनल ऑफिस-II ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत 247 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है, जिनकी कुल कीमत ₹10,021.46 करोड़ है। यह अब तक का सबसे बड़ा सिंगल अटैचमेंट ऑर्डर है। यह प्रॉपर्टी मुख्य रूप से पंजाब के SAS नगर (मोहाली), रुपनगर, जीरकपुर इलाकों में स्थित हैं। जांच में पाया गया है कि ये संपत्तियां निवेशकों से जुटाए गए फंड्स से खरीदी गई थीं, इसलिए इन्हें ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ माना गया है। सीबीआई ने 2014 में केस दर्ज था यह जांच CBI द्वारा 19 फरवरी 2014 को दर्ज FIR (नंबर RCBDI/2014/E/0004) पर आधारित है, जिसमें IPC की धारा 120-B और 420 के तहत मामला दर्ज किया गया था। यह FIR सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दर्ज की गई थी। PACL और संबंधित संस्थाओं पर आरोप है कि उन्होंने 48,000 करोड़ से ज्यादा की राशि लाखों निवेशकों से अवैध सामूहिक निवेश योजना (कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम) के जरिए जुटाई। निवेशकों को कृषि भूमि की बिक्री और विकास के बहाने लुभाया गया, कैश डाउन पेमेंट और किस्तों के प्लान दिखाए गए, लेकिन ज्यादातर मामलों में भूमि डिलीवर नहीं की गई और निवेशकों का पैसा वापस नहीं किया गया। स्कीम में फ्रंट कंपनियां और रिवर्स सेल ट्रांजेक्शन का इस्तेमाल करके फ्रॉड को छिपाया गया और गलत फायदे कमाए गए। ED ने 2016 में ECIR दर्ज किया, 2018 में पहला प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल किया, उसके बाद 2022, 2025 और 2026 में तीन सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट्स दाखिल कीं। स्पेशल PMLA कोर्ट ने सभी कंप्लेंट्स पर संज्ञान लिया है। पहले लुधियाना और जयपुर में अटैच की ED की जांच जारी है। इससे पहले भी जनवरी 2026 में लुधियाना और जयपुर में ₹1,986 करोड़ की 37 संपत्तियां अटैच की गई थीं, जिससे कुल अटैचमेंट ₹7,589 करोड़ तक पहुंच गया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमिटी (जस्टिस आर.एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में) अटैच की गई संपत्तियों की बिक्री से निवेशकों को रिफंड देने की प्रक्रिया चला रही है। यह कार्रवाई PACL जैसे बड़े पोंजी स्कीम घोटालों में निवेशकों के हितों की रक्षा और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ED ने आगे की जांच जारी रखने की बात कही है।
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