पूर्व सैनिकों के लिए बनी स्वास्थ्य योजना Ex-Servicemen Contributory Health Scheme (ईसीएचएस) में करोड़ों रुपये के घोटाले की परतें खुल रही हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई की जांच में सामने आया है कि चंडीगढ़ के एक प्राइवेट हेल्थ केयर ने निजी अस्पतालों के साथ मिलकर फर्जीवाड़े का जाल बिछाया। एक ही वेंटिलेटर पर एक समय में चार से पांच मरीजों को भर्ती दिखाकर हर मरीज का 4 से 5 लाख रुपये तक का बिल बनाया गया। एक वेंटिलेटर, चार मरीज भर्ती सीबीआई को मिली शिकायतों और प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि संबंधित अस्पताल में वेंटिलेटर केवल एक था, जबकि रिकॉर्ड में उसी समय चार से पांच ईसीएचएस मरीजों को वेंटिलेटर पर दिखाया गया। इससे साफ है कि कागजों में गंभीर हालत दिखाकर मोटी रकम वसूली गई। जांच में यह भी सामने आया है कि सामान्य मरीजों को भी आईसीयू में भर्ती दर्शाकर लाखों रुपये के बिल तैयार किए गए। मरीजों को यह तक जानकारी नहीं थी कि उन्हें कौन-कौन से इंजेक्शन लगाए गए या कौन से टेस्ट किए गए। इलाज के नाम पर बिलिंग बढ़ाने का खेल चलता रहा। फर्जी टेस्ट रिपोर्ट से गंभीर बीमारी दर्शाई प्राइवेट हेल्थ केयर द्वारा तैयार की गई कई मेडिकल रिपोर्टें फर्जी पाई गई हैं। बिना जांच किए मरीजों को गंभीर बीमारी से पीड़ित बताया गया। सेक्टर-38 वेस्ट स्थित कार्यालय में कथित तौर पर फर्जी टेस्ट रिपोर्ट तैयार की जाती थीं। सीबीआई के हाथ ऐसे दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य लगे हैं, जिनकी जांच जारी है। सूत्रों के अनुसार, ट्राईसिटी के कई अस्पतालों के साथ प्राइवेट हेल्थ केयर के एग्रीमेंट थे। एक अस्पताल को तो हर महीने एक करोड़ रुपये की बिलिंग का आश्वासन दिया गया था, जिसमें से 20 लाख रुपये प्रति माह हेल्थ केयर को मिलने थे। घोटाला उजागर होने के बाद संबंधित अस्पताल ने एग्रीमेंट रद्द कर दिया।
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