हम परिवार के छह सदस्य 27 फरवरी को दुबई गए थे। एक दिन अच्छी तरह से घूमे थे। इसके बाद ईरान और इस्राइल के बीच युद्ध शुरू हो गया। धमाकों और मिसाइल की गूंज से रुक कांप उठती थी। इन दिनों दवा तक खत्म हो गई थी और जहाज का टिकट भी तीन गुना महंगा कर दिया था। वे बड़ी मुश्किल से वापस पहुंचे हैं। अब राहत की सांस ली है।
यह कहना मॉडल टाउन निवासी बैंक से सेवानिवृत पवन राजपाल का। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी और बच्चों समेत छह सदस्य दुबई घूमने गए थे। हमलों के बाद फ्लाइट रद्द कर दी गई। उन्होंने अन्य कई देशों के माध्यम आने का प्रयास किया लेकिन वहां से भी बात नहीं बन पाई। सभी एयरपोर्ट बंद कर दिए गए थे। उन्होंने गोवा से होकर वापस आने का प्रयास किया था। चार-पांच दिन तक दुबई में भी रहना पड़ा। उनकी दवा भी खत्म हो गई थी और होटल में हर रोज 20 से 25 हजार रुपये खर्च आ रहा था। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि परिवार के साथ कहीं घूमने जाएं तो पैसे और दवा अतिरिक्त लेकर जाएं।
देश के काफी लोग फंसे
पवन राजपाल ने बताया कि दुबई में देश के काफी लोग फंसे हुए हैं। इनमें दिल्ली व मुंबई समेत दक्षिण भारत के लोग ज्यादा हैं। उनको वापस आने के लिए फ्लाइट नहीं मिल पा रही हैं। लोग टेंट में भी रहने को मजबूर हैं। लोगों को दुबई सरकार से कोई सहयोग नहीं मिला है जबकि आबू धाबी सरकार ने नि:शुल्क होटल दिया। दुबई में जहाज के टिकट तीन गुना अधिक रेट कर दिए हैं। बाजार खुले हुए थे। मिसाइल गिरने पर रेड अलर्ट आ जाता था। उन्होंने बताया कि दुबई का रहन-सहन अच्छा है। अब वहां जाने का कोई फायदा नहीं है। अभी देखने को कुछ नहीं है। वे मुंबई एयरपोर्ट पर आए। वहां फ्लाइट लेकर दिल्ली आए। अब राहत की सांस मिली है।