पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (जे.एन.एम. मेडिकल कॉलेज), रायपुर के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आशीष सिन्हा के खिलाफ एक और मामले में फंसते नजर आ रहे हैं। दरअसल, अपनी ही छात्रा से छेड़खानी के मामले में डॉ सिन्हा के खिलाफ FIR हुई थी। जमानत के बाद डॉ सिन्हा ने डॉ. सिन्हा द्वारा डीन, जे.एन.एम. मेडिकल कॉलेज रायपुर और आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के सामने शपथपत्र (एफिडेविट) में प्रस्तुत दिया है। आरोप है कि अपनी नौकरी बचाने के लिए इस एफिडेविट में आत्मसमर्पण की तारीख गलत दर्शाई गई है। इस मामले में मौदहापारा थाने में शिकायत दी गई है। दो महीने से अधिक तक फरार थे एफआईआर दर्ज होने के बाद डॉ. आशीष सिन्हा दो महीने से अधिक समय तक फरार रहे। इस दौरान उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए सेशन कोर्ट, रायपुर, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में आवेदन किया, जिसे तीनों स्तरों पर खारिज किए जाने का उल्लेख रिकॉर्ड में है। न्यायालयीन रिकॉर्ड: 8 सितंबर को आत्मसमर्पण, 12 सितंबर तक हिरासत इसके बाद 8 सितंबर 2025 को डॉ. आशीष सिन्हा ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। मामला गैर-जमानती होने के कारण उन्हें तत्काल हिरासत में लिया गया। 10 सितंबर 2025 को उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इस दिन के न्यायालयीन आदेश में भी आत्मसमर्पण की तारीख 8 सितंबर 2025 ही दर्ज है। 12 सितंबर 2025 को नियमित जमानत (रेगुलर बेल) का आवेदन प्रस्तुत किया गया और उसी दिन जमानत मिल गई। इस तरह न्यायालयीन रिकॉर्ड के अनुसार डॉ. आशीष सिन्हा 8 से 12 सितंबर 2025 तक हिरासत में रहे, जो 48 घंटे से अधिक की अवधि है। शपथपत्र में 10 सितंबर, बेल ऑर्डर में 8 सितंबर की आरोप है कि डॉ. आशीष सिन्हा ने डीन और आयुक्त को दिए गए शपथपत्र में आत्मसमर्पण की तारीख 10 सितंबर 2025 दर्शाई है। हालांकि, इसी शपथपत्र के साथ संलग्न न्यायालय के बेल ऑर्डर में पृष्ठ क्रमांक 9 पर स्पष्ट रूप से आत्मसमर्पण की तारीख 8 सितंबर 2025 दर्ज है। एक ही दस्तावेज-सेट में तारीखों के इस विरोधाभास को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जब न्यायालयीन आदेश में 8 सितंबर स्पष्ट है, तब शपथपत्र में 10 सितंबर लिखे जाने को प्रशासनिक स्तर पर कैसे स्वीकार किया गया। शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस विरोधाभास और कथित रूप से गलत तारीख दर्शाकर 48 घंटे से अधिक हिरासत को छिपाने एवं निलंबन से बचने के आरोपों को लेकर डीन कार्यालय, आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के सचिव को लिखित शिकायत दी गई थी। इसके बावजूद अब तक किसी ठोस विभागीय या प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। मौदहापारा थाने में FIR आवेदन इसके बाद डॉ. आशीष सिन्हा की ओर से कथित रूप से झूठा शपथपत्र देकर शासन-प्रशासन को गुमराह करने के आरोपों को लेकर मौदहापारा थाना में FIR के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया है। अब आगे की कार्रवाई पुलिस की प्रारंभिक जांच/एनक्वायरी पर निर्भर है।
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