ग्वालियर में ‘बहुएं’ दहेज के लिए रोज प्रताड़ित हो रही हैं। शादी के कुछ ही समय बाद कई घरों में पति, सास और ससुर बहुओं पर दहेज को लेकर ताने कसने लगते हैं। ताने धीरे-धीरे मानसिक और शारीरिक यातना में बदल जाते हैं। रोज की प्रताड़ना से टूटकर कई महिलाएं जानलेवा कदम उठाने तक को मजबूर हैं। पुलिस के आंकड़े कहते हैं कि साल 2025 में 1733 परिवारों में पति-पत्नी के बीच झगड़े हुए। 426 महिलाओं ने दहेज प्रताड़ना से परेशान होकर पति और ससुराल वालों पर केस दर्ज कराया। 2023 की बात करें तो 341 मामले सामने आए थे। यानी दो सालों में 24.9% दहेज प्रताड़ना के केस बढ़े हैं। 2024 में 497 बहुओं ने पुलिस से मदद मांगी थी। साफ है कि 2 सालों में दहेज प्रताड़ना के केस बढ़े हैं। विशेषज्ञों की मानें तो दहेज प्रथा की जड़ में शिक्षा का अभाव और लालच बड़ा कारण है। जब तक सोच नहीं बदलेगी और कानून का सख्ती से पालन नहीं होगा, तब तक बहुओं की पीड़ा यूं ही बढ़ती रहेगी। इन 4 केसों से समझिए… दहेज की आग में कैसे बुझ गईं जिंदगियां पीड़िता बातों को न छुपाएं, तुरंत शिकायत करें, तभी रुकेगी सुसाइड “दहेज प्रथा समाज की गंभीर समस्या है। शिक्षा का अभाव और लालच ही पारिवारिक कलह के सबसे बड़े कारण हैं। जिन परिवारों में पैसों को रिश्तों से ऊपर रखा जाता है, वहां विवाह लंबे समय तक नहीं टिकते। ससुराल में महिलाओं को मिलने वाले रोज़-रोज़ के ताने धीरे-धीरे शारीरिक हिंसा का रूप ले लेते हैं। बदनामी के कारण कई महिलाएं समय पर शिकायत नहीं करतीं। यदि पीड़िता या उसके परिजन समय रहते पुलिस से संपर्क करें तो आत्महत्या जैसे मामलों को रोका जा सकता है।” -रश्मि भदौरिया, टीआई, महिला थाना
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