पटना|रंग संस्था अभियान सांस्कृतिक मंच की ओर से रविवार को आईपीएस अधिकारी व संस्कृतिकर्मी सुशील कुमार की पुस्तक ‘साइबर कथाएं-डिजिटल सुरक्षा की राह’ पर परिचर्चा आयोजित की गई। संचालन गजेंद्रकांत शर्मा ने किया। वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक साइबर अपराध की कार्यशैली को कथात्मक शैली में सरल भाषा में प्रस्तुत करती है। संतोष दीक्षित ने इसे हिंदी में अपने ढंग की पहली महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह कथा जगत का आधुनिक विस्तार है। एमिटी यूनिवर्सिटी के डीन राजीव रंजन ने तकनीकी विषयों को सहज ढंग से समझाने की सराहना की। कवयित्री गुंजन उपाध्याय पाठक ने कहा कि पुस्तक सोशल मीडिया से जुड़े खतरों के प्रति सजग करती है, जबकि कवि रमेश ऋत्मभर ने इसे रचनात्मक लेखन के माध्यम से समय और समाज की प्रवृत्तियों को उजागर करने वाली कृति बताया। लेखक सुशील कुमार ने बताया कि 2015-18 के बीच बढ़ते साइबर अपराधों के अनुभवों को 50 लघु कथाओं में पिरोया है, जिनमें पात्रों की निजता की रक्षा के लिए नाम परिवर्तित किए गए हैं। अध्यक्षता प्रख्यात कवि आलोक धन्वा ने की। धन्यवाद ज्ञापन चंद्रबिंद सिंह ने किया।
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