धर्मशाला में रविवार को राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले प्रदेश सरकार की नई परिसर प्रणाली (क्लस्टर सिस्टम) के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया गया। जिला कांगड़ा के 23 खंडों से 3000 से अधिक प्राथमिक शिक्षक, सेवानिवृत्त कर्मचारी और जेबीटी प्रशिक्षु ‘आग्रह रैली’ में शामिल हुए। बड़ी संख्या में जुटे शिक्षकों ने सरकार के फैसले के खिलाफ एकजुटता दिखाई। रैली की शुरुआत डीआईजी मैदान से हुई और यह जिलाधीश कार्यालय तक पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने धरना देकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान शिक्षकों ने शिक्षा विभाग द्वारा 23 सितंबर 2025 को जारी अधिसूचना के खिलाफ कड़ा रोष व्यक्त किया। उनका कहना है कि नई अधिसूचना से प्राथमिक शिक्षा के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव किए गए हैं। प्रिंसिपल के हाथ हो प्रशासनिक नियंत्रण संघ के पदाधिकारियों का आरोप है कि नई व्यवस्था के तहत प्राथमिक शिक्षा का पूर्ण प्रशासनिक नियंत्रण और संचालन प्रिंसिपल को सौंप दिया गया है। शिक्षकों का तर्क है कि वर्ष 1984 से प्राथमिक शिक्षा का स्वतंत्र ढांचा और क्लस्टर प्रणाली प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है, जिसे बदलने की आवश्यकता नहीं है।
नई प्रणाली से प्रशासनिक केंद्रीय करण बढ़ेगा प्रदर्शनकारियों ने आशंका जताई कि नई प्रणाली लागू होने से प्रशासनिक केंद्रीकरण बढ़ेगा और प्राथमिक शिक्षकों को दोहरी प्रशासनिक इकाइयों के अधीन कार्य करना पड़ेगा। इससे कार्य का बोझ बढ़ेगा और शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। शिक्षकों ने मांग की कि 13 फरवरी 2024 की संशोधित अधिसूचना को यथावत रखा जाए और नई प्रणाली को केवल संसाधन साझा करने तक सीमित किया जाए। रैली के समापन पर जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपा गया। संघ ने चेतावनी दी कि यदि अधिसूचना तुरंत वापस नहीं ली गई तो जिला स्तर पर शुरू हुआ यह विरोध प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन का रूप ले सकता है।
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