Dhar Bhojshala: भोजशाला के भविष्य की सुनवाई कल से; एएसआई की रिपोर्ट खुलेगी, इसी से तय होगा आगे का रास्ता
भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन धार की ऐतिहासिक भोजशाला के भविष्य को लेकर सोमवार से हाई सुनवाई होने जा रही है। इसकी शुरुआत में पहले दिन एएसआई द्वारा प्रस्तुत की गई सर्वे की रिपोर्ट खोली जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर भोजशाला मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय इंदौर में नियत है। सुनवाई न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की कोर्ट में 62वें नंबर पर होगी। सुनवाई के दौरान ही रिपोर्ट की प्रतियां हिंदू व मुस्लिम समाज के दोनों पक्षकारों सहित अभिभाषकों को उपलब्ध करवाई जाएगी। यह पहली मर्तबा होगा जब एएसआई की रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से सामने आएगी। क्योंकि अब एएसआई द्वारा किए गए 98 दिनों के वैज्ञानिक सर्वे के आधार पर ही भोजशाला का भविष्य और उसका धार्मिक स्वरूप तय होगा। यह रिपोर्ट ही तय करेगी कि भोजशाला का वास्तविक स्वरूप क्या है।
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मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित है भोजशाला
– फोटो : अमर उजाला
शीर्ष अदालत ने दिए थे अहम निर्देश
दरअसल दो सप्ताह पहले 28 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने धार की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़ी याचिका पर अहम निर्देश जारी किए थे। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के विरुद्ध दायर अपील का निस्तारण करते हुए निर्देश दिया कि इस मामले की सुनवाई डिवीजन बेंच द्वारा की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश करेंगे। कोर्ट ने कहा था कि यदि रिपोर्ट का कोई हिस्सा कॉपी करने योग्य न हो, तो विशेषज्ञ और अधिवक्ताओं की मौजूदगी में उसके निरीक्षण की अनुमति दी जाए।
पूजा-नमाज की व्यवस्था यथावत लागू रहेगी
पक्षकारों को अपनी आपत्तियां या सुझाव दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मिलेगा। हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय तक भोजशाला के मूल स्वरूप में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। 7 अप्रैल 2003 को जारी एएसआई के आदेश अनुसार पूजा-नमाज की व्यवस्था यथावत लागू रहेगी। हालांकि शीर्ष अदालत ने मामले की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की है, सभी कानूनी दलीलें हाईकोर्ट में खुली रहेंगी।
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धार भोजशाला को लेकर 1952 से बढ़ने लगा तनाव
– फोटो : अमर उजाला
एएसआई सर्वे के आधार पर तय होगा भविष्य
याचिकाकर्ता का मानना है कि 98 दिनों के एएसआई सर्वे के आधार पर अब हाईकोर्ट भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करेगा। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन नई दिल्ली और हाई कोर्ट के अभिभाषक विनय जोशी के साथ हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से याचिकाकर्ता आशीष गोयल उच्च न्यायालय इंदौर में सुनवाई के दौरान उपस्थित रहेंगे।
क्या है भोजशाला का इतिहास?
भोजशाला का इतिहास 11वीं शताब्दी से शुरू होता है। कहा जाता है कि यहां पर देवी सरस्वती का मंदिर था। 12वीं-13वीं सदी में इस मंदिर को तबाह कर दिया गया और इसी जगह पर एक मकबरा और उसके करीब मस्जिद का निर्माण हुआ।

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