जलाशय तैयार किए गए बड़े जलाशय
योजना के तहत 21 मोटर पंप लगाए जा रहे हैं और नई पाइपलाइन बिछाने का महत्वपूर्ण कार्य लगभग पूरा हो चुका है. पुटकी और झरिया क्षेत्र में पानी की स्टोरेज क्षमता बढ़ाने के लिए 500 KL और 400 KL क्षमता के बड़े जलाशय तैयार किए गए हैं. झरिया के ऊषा टॉकीज के समीप पांच टंकियों का निर्माण पूर्ण हो चुका है, जबकि भूलन बरारी में एक और पुटकी में एक टंकी भी तैयार कर ली गई है. आगामी वर्षों में इन जलाशयों से धनबाद व आसपास की आबादी को सुचारू पानी आपूर्ति शुरू हो जाएगी.
NH से एनओसी नहीं मिलने से हो रही देरी
माडा के अनुमंडल पदाधिकारी सचिन ने बताया कि अब तक 60 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है. इंटेक वेल का 90 प्रतिशत और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) का 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. इंटेक वेल से डब्ल्यूटीपी तक करीब एक किलोमीटर राइजिंग पाइप लाइन बिछानी है, जिस पर तेजी से कार्य चल रहा है. रेलवे की ओर से पहले ही एनओसी मिल चुकी है, जिससे करकेंद और होरलाडीह क्रॉसिंग पर पाइप लाइन बिछाने का कार्य आगे बढ़ रहा है. झरिया में पांच, पुटकी में एक, करकेंद में एक और भूलन बरारी में एक संप का निर्माण भी पूरा हो चुका है. हालांकि आरसीडी और एनएच से एनओसी न मिलने के कारण कुछ कार्यों में देरी हो रही है.
उन्होंने यह भी बताया कि इंटेक वेल और डब्ल्यूटीपी के लिए बिजली विभाग को भुगतान कर दिया गया है, और जल्द ही वहां बिजली की सप्लाई शुरू हो जाएगी. योजना के अंतर्गत कुल 55,000 घरों में जल कनेक्शन देना है, जिनका सर्वे पूरा कर लिया गया है.
2026 में शुरू होगी सेवा
समाजसेवी बाबू राजकिशोर जैन ने जानकारी दी कि इस परियोजना में जमाडा के बाजार शुल्क से 188 करोड़ और डीएमएफटी फंड से 122 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. वर्ष 2019 में शुरू हुई यह योजना कोरोना काल में करीब एक साल रुकी रही, और बाद में तकनीकी चुनौतियों के कारण कार्य धीमा हुआ. कंपनी को तीसरी बार समय विस्तार दिया गया है. मार्च 2026 तक लगभग 50 नलों से 7 किलोमीटर के दायरे में पानी की आपूर्ति शुरू हो जाएगी, जबकि दिसंबर 2026 तक पूरा पुटकी धनबाद क्षेत्र नियमित सप्लाई से जुड़ जाएगा.
पानी के चक्कर में अस्थमा की शिकार
भुक्तभोगी टिंकू मोदक ने बताया कि 2010 के बाद से उनके घर में पानी की भारी किल्लत रही. पानी लाने के लिए उन्हें और उनकी मां को रोजाना एक किलोमीटर दूर जाना पड़ता था. भारी वजन ढोने से उनके घुटनों में दर्द हो गया और उनकी मां अस्थमा की मरीज बन गईं. बाद में समाजसेवी राजकिशोर जैन ने उनकी समस्या सुनकर जमाडा से नि:शुल्क जल कनेक्शन चालू करवाया.
वहीं गणेश मालाकार बताते हैं कि 2003 से वे बनियहीर छठ तालाब के पास से रोजाना एक किलोमीटर दूर पानी भरकर लाते हैं. पानी की समस्या के कारण नियमित मजदूरी भी प्रभावित होती है. उन्हें विश्वास है कि जलापूर्ति योजना पूरी होने के बाद उनके क्षेत्र की दशकों पुरानी समस्या समाप्त हो जाएगी.
झरिया धनबाद क्षेत्र के लोगों के लिए यह योजना सिर्फ एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि जीवन में राहत और नई उम्मीदों की किरण लेकर आ रही है.
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