धनबाद झारखंड के लिए यह गर्व का क्षण है कि जिले के प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता एवं जय धरती मां फाउंडेशन के संस्थापक रवि कुमार निषाद को गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया जाएगा
रवि कुमार निषाद ने समाज की वास्तविक जरूरतों को समझते हुए जमीनी स्तर पर काम करने की मिसाल पेश की है. उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को केंद्र में रखते हुए पौधारोपण, जल संरक्षण, किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण, युवाओं को स्वरोज़गार से जोड़ने तथा महिलाओं को कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराने जैसी अनेक प्रभावी पहलें शुरू कीं. धनबाद जैसे प्रदूषण-ग्रस्त क्षेत्र में उनके प्रयासों ने पर्यावरण सुधार की दिशा में नई उम्मीद जगाई है.
3 लाख से अधिक पौधों का रोपण
जय धरती मां फाउंडेशन के नेतृत्व में बीते वर्षों में 3 लाख से अधिक पौधों का रोपण17,890 किसानों को प्रशिक्षण, 13,780 विद्यार्थियों को शिक्षा सहायता तथा 17,560 युवाओं व महिलाओं को रोजगार प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया है. यह उपलब्धियां न केवल संख्यात्मक रूप से उल्लेखनीय हैं. बल्कि इनके सामाजिक प्रभाव ने हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है. खास तौर पर 1 करोड़ पौधारोपण महाअभियान और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि-बागवानी को बढ़ावा देकर संस्था ने आजीविका सुदृढ़ीकरण का मजबूत मॉडल प्रस्तुत किया है.
रवि कुमार निषाद को मिलेगा राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार
रवि निषाद का योगदान इसलिए भी प्रेरणादायक है क्योंकि उन्होंने अनुपजाऊ और बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने का कार्य किया. पपीता, मिलेट्स विविध सब्जियों की खेती के साथ-साथ 3 लाख से अधिक विदेशी आम के पौधों का सफल उत्पादन उनके प्रयासों की जीवंत मिसाल है. आज संस्था से जुड़े करीब 12,000 किसान इन पहलों से लाभान्वित हो रहे हैं. वर्तमान में फाउंडेशन के 204 सक्रिय सदस्य विभिन्न क्षेत्रों और प्रखंडों में कार्यरत हैं.रवि कुमार निषाद मूल रूप से धनबाद के भूली के निवासी हैं. उनकी प्रारंभिक शिक्षा भूली के सरकारी स्कूल से हुई. इसके बाद उन्होंने दिल्ली से बीएससी आईटी की पढ़ाई पूरी की. शिक्षा पूर्ण करने के बाद वे धनबाद लौटे. उनके जीवन में निर्णायक मोड़ तब आया जब तमिलनाडु राज्य के वेल्लोर में इलाज के दौरान उनकी मां का निधन हो गया. रवि निषाद के अनुसार, प्रदूषण उनकी मां की बीमारी और मृत्यु का एक प्रमुख कारण था. इस व्यक्तिगत क्षति ने उन्हें पर्यावरण संरक्षण के लिए आजीवन समर्पित कर दिया.
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