Dhanbad News: धनबाद शहर से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भटिंडा फॉल इन दिनों सैलानियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. पुटकी–मुनीडीह क्षेत्र में स्थित प्राकृतिक जलप्रपात अपनी खूबसूरती, शांत वातावरण और रोमांचक नजारों के लिए जाना जाता है
भटिंडा फॉल तक पहुंचना भी काफी आसान और किफायती है. धनबाद स्टेशन से ऑटो पकड़कर पुटकी थाना के पास उतरना होता है, जहां से दूसरे ऑटो द्वारा सीधे भटिंडा फॉल तक पहुंचा जा सकता है. कुल मिलाकर करीब 100 रुपये के बजट में सैलानी पर्यटन स्थल तक पहुंच सकता है. यही कारण है कि कॉलेज स्टूडेंट्स, परिवार और पिकनिक मनाने वाले लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं.
यहां लोग मनाने आते है पिकनिक
स्थानीय लोगों के अनुसार, भटिंडा फॉल में सबसे अधिक भीड़ नए साल के आसपास देखने को मिलती है. यहां 25 दिसंबर से लेकर 15 जनवरी तक पिकनिक मनाने वालों का तांता लगा रहता है. यहां चट्टानों के बीच तीन प्राकृतिक तालाब बने हुए हैं. पानी पहले बड़े तालाब में गिरता है. फिर ओवरफ्लो होकर मध्य तालाब और अंत में छोटे तालाब तक पहुंचता है। हर तालाब के भीतर गहरे कुएं जैसे प्राकृतिक गड्ढे हैं, जो इस स्थान को और भी रहस्यमय बनाते हैं.भटिंडा फॉल की एक और खासियत है दो नदियों का संगम. कतरी नदी, जो पारसनाथ पहाड़ से निकलकर उत्तर से दक्षिण की ओर बहती है. मुनीडीह होते हुए भटिंडा फॉल तक पहुंचती है. वहीं पूरब दिशा से दामोदर नदी आती है. फॉल के पास इन दोनों नदियों का मिलन होता है. जब नदी की तेज धार चट्टानों से टकराकर लगभग 10 मीटर की ऊंचाई से नीचे गिरती है, तो नजारा बेहद मनोरम हो जाता है.
भटिंडा फॉल में लगा हुआ है झूला
भटिंडा फॉल के निर्माण को लेकर भी अलग-अलग मान्यताएं हैं. यह पूरी तरह से प्रकृति की देन है, जबकि कुछ का कहना है कि यहां पहले बलुआ पत्थर का खनन होता था, जिससे यह फॉल अस्तित्व में आया. हालांकि, इसकी प्राकृतिक सुंदरता आज भी लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है.यहां मनोरंजन के कई साधन भी मौजूद हैं. स्थानीय निवासी बसंत महतो ने बताया कि वे पिछले पांच वर्षों से जंपिंग झूले और अन्य झूले लगाते आ रहे हैं. मिक्की माउस, तारा मशीन, टोरा-टोरा और नौका जैसे झूले बच्चों और बड़ों दोनों को खूब लुभाते हैं. इन झूलों का किराया ₹30 से ₹40 तक है. इसके अलावा सुलभ शौचालय, चेंजिंग रूम, फव्वारा और बच्चों के लिए विशेष झूले बनाए गए हैं, जिससे सैलानियों को काफी सहूलियत मिलती है.
यहां एंट्री शुल्क 50 रुपये
स्थानीय गोताखोर लकी बावरी ने बताया कि वर्तमान में भटिंडा फॉल में करीब 20 गोताखोर मौजूद हैं, जिनमें से आठ हमेशा एक्टिव रहते हैं. उनका कहना है कि वे तीसरी पीढ़ी से इस प्राकृतिक धरोहर की देखभाल करते आ रहे हैं. खासकर दिसंबर और जनवरी के महीनों में बंगाल और बिहार से बड़ी संख्या में लोग यहां पिकनिक मनाने आते हैं.नौका विहार भी यहां का एक बड़ा आकर्षण है. संचालनकर्ता रवि कुमार ने बताया कि पिछले एक वर्ष से पैडल बोट की सुविधा शुरू की गई है. करीब 25 मिनट तक चलने वाली इस बोट में एक बार में चार लोग बैठ सकते हैं. सुरक्षा के लिए हर समय एक गोताखोर मौजूद रहता है. इसका शुल्क प्रति व्यक्ति ₹50 और पूरी बोट के लिए ₹200 रखा गया है, जिसका उपयोग फॉल के रखरखाव में किया जाता है.
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