दुर्गा तिलकुट भंडार की खासियत यह है कि यहां पारंपरिक तरीके से तिलकुट तैयार किया जाता है. तिलकुट बनाने के लिए खास तौर पर बिहार के गया जिले से अनुभवी कारीगरों को बुलाया जाता है, जो पीढ़ियों से इस काम में माहिर हैं. चीनी और गुड़ से तैयार किया जाने वाला तिलकुट यहां बड़ी सावधानी और मेहनत से बनाया जाता है, ताकि उसका स्वाद और गुणवत्ता बनी रहे.
दुकान के संचालक रंजीत गुप्ता ने न्यूज 18 लोकल से बातचीत में बताया कि उनका परिवार पिछले 40 वर्षों से तिलकुट के कारोबार से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि हर साल नए साल और मकर संक्रांति के समय तिलकुट की मांग कई गुना बढ़ जाती है. दुकान पर चीनी और गुड़ दोनों प्रकार के तिलकुट उपलब्ध हैं. सामान्य चीनी व गुड़ का तिलकुट 240 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है, जबकि स्पेशल तिलकुट की कीमत 260 रुपये प्रति किलो रखी गई है. स्वाद और शुद्धता के कारण दूर-दराज से लोग यहां तिलकुट खरीदने पहुंचते हैं.
रखा जाता है सुरक्षा का विशेष ख्याल
रंजीत गुप्ता ने यह भी बताया कि तिलकुट निर्माण में फिलहाल करीब 25 कारीगर काम कर रहे हैं. कोरोना के अनुभव को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा का विशेष ख्याल रखा जा रहा है. सभी कारीगर कैप और मास्क पहनकर काम कर रहे हैं, ताकि साफ-सफाई और सेफ्टी के मानकों का पालन हो सके.
वहीं, तिलकुट बनाने वाले कारीगर कमलेश कुमार ने बताया कि वह पिछले छह वर्षों से झरिया में दुर्गा तिलकुट भंडार में काम कर रहे हैं. उन्होंने तिलकुट बनाने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया. कमलेश के अनुसार, एक तिलकुट तैयार करने में लगभग एक घंटे का समय लगता है. सबसे पहले चीनी या गुड़ की चाशनी बनाई जाती है, फिर उसे तैयार कर एक खूंटी पर टांगा जाता है. इसके बाद तिल को धीमी आंच पर करीब आधे घंटे तक भुना जाता है. फिर तिल को चाशनी में मिलाकर तेल से लपेटा जाता है और ओखली की मदद से काटकर तिलकुट का आकार दिया जाता है. एक तिलकुट की कीमत करीब 20 रुपये होती है.
गया जिला से आते हैं कारीगर
कमलेश कुमार ने बताया कि मुख्य रूप से बिहार के गया जिले के रहने वाले दर्जनों कारीगर दीपावली से पहले झरिया आ जाते हैं और मकर संक्रांति तक लगातार तिलकुट बनाने का काम करते हैं. इसके बाद वे अपने गांव लौटकर खेती-बाड़ी और सब्जी उत्पादन में जुट जाते हैं. इस तरह तिलकुट का यह पारंपरिक व्यवसाय न केवल मिठास बांटता है, बल्कि कई परिवारों की आजीविका का भी महत्वपूर्ण साधन बना हुआ है.
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