झारखंड सरकार ने एक बार फिर विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़ा निर्णय लिया है. सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य में संचालित सभी कोटि के सरकारी, गैर-सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक सहित एवं सभी निजी विद्यालयों में दिनांक 6 जनवरी 2026 से 8 जनवरी 2026 तक सभी कक्षाएं बंद रहेंगी.
गौरतलब है कि इससे पहले भी शीतलहरी के मद्देनज़र 24 दिसंबर 2025 से 4 जनवरी 2026 तक राज्य के सभी स्कूलों को बंद रखा गया था. उस दौरान भी सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को ठंड और शीतलहरी के दुष्प्रभाव से बचाना था. एक बार फिर तापमान में गिरावट और ठंडी हवाओं के चलते सरकार ने यह एहतियाती कदम उठाया है.
न्यूनतम तापमान लगभग 12 डिग्री सेल्सियस दर्ज
धनबाद सहित राज्य के कई जिलों में न्यूनतम तापमान लगातार गिर रहा है. सोमवार को धनबाद का न्यूनतम तापमान लगभग 12 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं ठंडी हवाओं और घने कोहरे के कारण जनजीवन प्रभावित रहा. सुबह के समय स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों और किशोर विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर इसका प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही था.राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश में भी स्पष्ट किया गया है कि उक्त अवधि के दौरान सभी सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मी अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगे और विद्यालय में गैर-शैक्षणिक कार्यों का निष्पादन सुनिश्चित करेंगे. यानी स्कूल बंद रहने के बावजूद प्रशासनिक एवं आवश्यक कार्य जारी रहेंगे.
6 से 8 जनवरी तक सभी स्कूल बंद
इसके साथ ही सरकार ने यह भी निर्देश दिया है. कि यदि इस अवधि में किसी विद्यालय में प्री-बोर्ड परीक्षा निर्धारित है. तो संबंधित विद्यालय के सक्षम प्राधिकार अपने विवेकानुसार परीक्षा संचालन को लेकर निर्णय ले सकते हैं. ऐसे मामलों में विभागीय सचिव का अनुमोदन प्राप्त किया गया है, जिससे यह स्पष्ट है कि परीक्षा संचालन को लेकर लचीलापन रखा गया है. इस निर्णय के बाद राज्यभर के अभिभावकों में संतोष और खुशी देखी जा रही है. अभिभावकों का कहना है कि इस कड़ाके की ठंड में बच्चों को सुबह-सुबह स्कूल भेजना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता था. छोटे बच्चों में सर्दी, खांसी और बुखार जैसी समस्याओं का खतरा अधिक रहता है, ऐसे में सरकार का यह फैसला समयोचित और सराहनीय है.वहीं शिक्षाविदों का भी मानना है कि ठंड के इस मौसम में विद्यार्थियों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है. पढ़ाई बाद में भी पूरी की जा सकती है, लेकिन बच्चों का स्वास्थ्य सर्वोपरि है. कई निजी विद्यालयों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है और आदेश का पालन सुनिश्चित करने की बात कही है.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.