राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) और पटना जू के बीच जानवरों के आदान-प्रदान पर सहमति बनी है। इस एक्सचेंज के तहत दिल्ली चिड़ियाघर को पटना से एक बाघ मिलेगा, जबकि दिल्ली से एक सफेद बाघिन सहित कई जानवर पटना भेजे जाएंगे।
एनिमल एक्सचेंज समझौते के तहत मार्च में पटना से चिड़ियाघर को एक बाघ, चार घड़ियाल, चार ग्रे वुल्फ (दो नर और दो मादा) और दो बार्न आउल मिलेंगे। इसके बदले दिल्ली जू से संगाई हिरण (मणिपुर हिरण), एक सफेद बाघिन, पेंटेड स्टॉर्क, सफेद पेलिकन और काले हिरण पटना भेजे जाएंगे। इस अदला-बदली का उद्देश्य दोनों चिड़ियाघरों में प्रजातियों की विविधता बढ़ाना और बेहतर ब्रीडिंग सुनिश्चित करना है। इस प्रस्ताव को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की मंजूरी भी मिल
चुकी है।
चिड़ियाघर निदेशक डॉ. संजीत कुमार ने बताया कि यह कदम चिड़ियाघर में प्रजातियों की विविधता बढ़ाने और बेहतर ब्रीडिंग (प्रजनन) सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। निदेशक ने बताया कि अभी दिल्ली जू में कुल 13 बाघ और उनके शावक हैं। इनमें 7 रॉयल बंगाल टाइगर और 6 सफेद बाघ शामिल हैं।
जू में मादा बाघों की संख्या ज्यादा है, जबकि नर बाघों की संख्या कम और अधिकतर उम्रदराज हैं। उन्होंने कहा कि अगर समय-समय पर जानवरों का दूसरे जू के साथ आदान-प्रदान नहीं किया जाए, तो इनब्रीडिंग का खतरा बढ़ जाता है। इससे कमजोर शावक, आनुवंशिक बीमारियां और प्रजनन में दिक्कतें हो सकती हैं। लंबे समय तक अकेले रहने से जानवरों की मानसिक सेहत पर भी असर पड़ सकता है।
अधिकारी के अनुसार, चार नए घड़ियालों को मौजूदा तीन समूहों में जोड़ा जाएगा, जिससे उनकी संख्या बढ़ेगी और दर्शकों को भी ज्यादा प्रजातियां देखने को मिलेंगी। इस एक्सचेंज को नियमों के तहत केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की मंजूरी मिल चुकी है।
निदेशक ने बताया कि पिछले साल भी सूरत और असम के चिड़ियाघरों के साथ इसी तरह का आदान-प्रदान किया गया था। जू प्रबंधन का कहना है कि ऐसे एक्सचेंज से जानवरों की सेहत बेहतर रहती है और ब्रीडिंग प्रोग्राम मजबूत होता है।
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