Tom Alter Story: देहरादून की वादियों से निकलकर मायानगरी में अपनी धाक जमाने वाले टॉम ऑल्टर भले ही पर्दे पर ‘अंग्रेज’ नजर आते थे, लेकिन उनकी रूह पूरी तरह हिंदुस्तानी थी. शुद्ध हिंदी और उर्दू के लफ्जों पर उनकी पकड़ ने बड़े-बड़े दिग्गजों को हैरान किया. मसूरी और राजपुर की गलियों से उनका रिश्ता इतना गहरा था कि वे अक्सर अपनी व्यस्तता के बीच सुकून ढूंढने ‘क्रिश्चियन रिट्रीट एंड स्टडी सेंटर’ पहुंच जाते थे, जिसकी नींव उनके पिता ने रखी थी. अभिनय के साथ-साथ खेल पत्रकारिता में भी उनका योगदान बेमिसाल रहा वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने नन्हे सचिन तेंदुलकर की प्रतिभा को पहचानकर उनका पहला वीडियो इंटरव्यू लिया था.
विदेशी चेहरा और हिंदुस्तानी दिल
देहरादून की वादियों से निकलकर मुंबई के पर्दे पर पहचान बनाने वाले टॉम ऑल्टर का व्यक्तित्व किसी परिचय का मोहताज नहीं है. एक विदेशी चेहरे के बावजूद उनकी रूह पूरी तरह हिंदुस्तानी थी, जिसे उन्होंने अपनी शुद्ध हिंदी और उर्दू के लफ्जों से साबित किया. मसूरी और देहरादून की हवाओं और पुरानी इमारतों में आज भी उनकी मौजूदगी महसूस की जा सकती है. उनके अभिनय की गहराई ने उन किरदारों को भी अमर बना दिया जो अक्सर उन्हें एक ‘विदेशी’ के रूप में मिले थे.
संस्थान के प्रबंधक सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि टॉम ऑल्टर का पारिवारिक इतिहास शिक्षा और सेवा से जुड़ा रहा है. उनके पिता जेम्स पियाने ऑल्टर एक अमेरिकी मिशनरी थे, जिन्होंने 1954 में राजपुर में इस सेंटर की नींव रखी थी. इसका मकसद रिसर्च और ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित करना था. आज यहां देश-विदेश से ग्रुप ठहरने और सेमिनार के लिए आते हैं. यह स्थान किसी भी जाति या धर्म के समूह के लिए खुला है, जहां 100 लोगों के रहने की क्षमता है और सात्विक भोजन दिया जाता है. टॉम ऑल्टर अक्सर यहां अपना खाली समय बिताने आया करते थे. वे मसूरी में बेहद सामान्य जीवन जीते थे और लोगों से बड़े मिलनसार तरीके से मिलते थे.
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खेल पत्रकार के रूप में बड़ी उपलब्धि
एक्टिंग के अलावा टॉम ऑल्टर की एक अहम पहचान खेल पत्रकार के रूप में भी थी. उन्हें क्रिकेट की गहरी समझ थी और वे खेलों के प्रति बेहद जुनूनी थे. इतिहास के पन्नों में यह दर्ज है कि क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का सबसे पहला वीडियो साक्षात्कार लेने वाले व्यक्ति टॉम ऑल्टर ही थे. उन्होंने उस समय के उभरते हुए खिलाड़ी की प्रतिभा को पहचान लिया था, जो उनके दूरदर्शी व्यक्तित्व का प्रमाण है.
शांति और सुकून का केंद्र
आज भी अगर आप देहरादून की यात्रा पर निकलते हैं, तो राजपुर स्थित यह सेंटर आपको एक अलग दुनिया में ले जाता है. यह उन पर्यटकों के लिए स्वर्ग के समान है जो शहरी शोर-शराबे से दूर सुकून ढूंढ रहे हैं. यहां की हरियाली और शांति वही एहसास दिलाती है जो कभी टॉम ऑल्टर को यहां खींच लाती थी. टॉम ऑल्टर भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन भारतीय सिनेमा में उनका योगदान और उत्तराखंड की पहाड़ियों से उनका लगाव हमेशा याद रखा जाएगा.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें
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