Jaunsari Art Dehradun : श्रद्धा अपने दादा की विरासत को हमेशा जिंदा रखना चाहती हैं. अगर आप जौनसारी टोपी या जैकेट खरीदना चाहते हैं तो देहरादून के रेंजर्स ग्राउंड में चल रहे उत्तराखंड ट्रेड एक्सपो में आ सकते हैं, जहां आप जौनसारी जैकेट 700 रुपए और टोपियां 200 रुपए के हिसाब से ले सकते हैं. श्रद्धा बताती हैं कि उन्होंने पारंपरिक डिजाइनों में आधुनिकता का तड़का लगाया और सोशल मीडिया के जरिए इसे ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर पेश किया. श्रद्धा का यह कदम न सिर्फ उनकी संस्कृति को जीवंत कर रहा है, बल्कि उनके परिवार के साथ कारीगरों के लिए रोजगार के लिए नई राह भी खोल रहा है.
आधुनिकता का तड़का
लोकल 18 से बात करते हुए श्रद्धा कहती हैं कि वह पहले एक होटल में नौकरी करती थीं. लगभग 12 घंटे की नौकरी के बाद भी उन्हें सुकून नहीं मिलता था. उन्होंने बचपन से अपने दादा और पिता को जौनसारी टोपियों पर काम करते देखा था. उन्होंने अपने इस पुश्तैनी कारोबार की कमान संभाल ली ताकि वह नए जमाने की डिमांड के हिसाब से इन चीजों को तैयार कर सकें. उनका लक्ष्य इसे सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित रखना नहीं था. श्रद्धा बताती हैं कि उन्होंने पारंपरिक डिजाइनों में आधुनिकता का तड़का लगाया और सोशल मीडिया के जरिए इसे ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर पेश किया. उन्होंने महिलाओं की जौनसारी जैकेट पर रेशमी धागों से एंब्रॉयडरी करनी शुरू की और यह महिलाओं के ट्रेडिशनल-एथनिक लुक का हिस्सा बन गई. यह जैकेट न सिर्फ जौनसारी महिलाओं की वेशभूषा का हिस्सा बनी बल्कि इन्हें वैस्टर्न ड्रेस वाली महिलाओं ने भी सराहा क्योंकि यह शर्ट और टॉप पर भी बेहद खास लुक देती हैं.
श्रद्धा ने बताया कि आज उनके हाथ से बुनी गई ऊनी जैकेट और नक्काशीदार टोपियों की मांग अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में होने लगी है. चकराता घूमने आने वाले लोग इन्हें लेकर जाते हैं और फिर दोबारा आने पर अपने नातेदारों के लिए भी ले जाते हैं. श्रद्धा का कहना है कि जो हुनर उनके दादा-परदादाओं ने संजोया था, उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना ही उनके जीवन का उद्देश्य है. श्रद्धा ने बताया कि उनके दादा रूकमदास की बनाई गई टोपियां लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से लेकर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और त्रिवेंद्र सिंह रावत के सिर भी सज चुकी हैं.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें
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