एक समय जम्मू-कश्मीर से करीब 10 हजार छात्र उत्तराखंड में पढ़ाई के लिए आते थे, खासतौर पर मेडिकल, कृषि, पैरामेडिकल और फार्मेसी जैसे कोर्सेज के लिए. बीते कुछ वर्षों में हुई घटनाओं के बाद यह संख्या घटकर करीब 2 हजार रह गई है. बड़ी संख्या में छात्र अब पंजाब और चंडीगढ़ का रुख कर चुके हैं. इसी तरह नॉर्थ ईस्ट से भी बड़ी संख्या में छात्र उत्तराखंड आते रहे हैं. फिलहाल प्रदेश में करीब 4 हजार नॉर्थ ईस्ट के छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन हालिया घटनाओं ने उनके मन में भी डर पैदा कर दिया है.
एंजेल चकमा की मौत
मामला सेलाकुई थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया. दरअसल त्रिपुरा के 17 वर्षीय छात्र एंजेल चकमा बीती 9 दिसंबर कोअपने छोटे भाई माइकल चकमा के साथ सामान खरीदने निकले थे. इसी दौरान विवाद हुआ, जो बाद में हिंसक झड़प में बदल गया. एंजेल चकमा पर चाकू से हमला किया गया. 17 दिन तक अस्पताल में इलाज के बाद उनकी बीती शुक्रवार को मौत हो गई.
पुलिस ने इस मामले में शौर्य राजपूत, अविनाश नेगी, सूरज खवास, आयुष बडोनी और सुमित को गिरफ्तार किया है. हत्या में इस्तेमाल चाकू भी बरामद कर लिया गया है, जबकि मुख्य आरोपी यज्ञ राज अवस्थी अब भी फरार है. उसकी तलाश में पुलिस की टीमें नेपाल बॉर्डर तक भेजी गई हैं. न्यूज़ 18 की जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों में से दो आरोपी नाबालिग हैं, जो सेलाकुई क्षेत्र के दो अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते हैं. अन्य आरोपियों में अविनाश नेगी शंकरपुर का निवासी है और धुलकोट तिराहे पर चाय की दुकान चलाता है. सुमित तिलवाड़ी, सेलाकुई का निवासी है, जो खेती-बाड़ी के साथ एक फैक्ट्री में काम करता था. जबकि सूरज, जो एक बेकरी की दुकान चलाता है, मूल रूप से मणिपुर का निवासी है. पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी यज्ञ राज अवस्थी हरिद्वार में रह रहा था और मूल रूप से नेपाल का निवासी है. पुलिस का यह भी कहना है कि आरोपियों का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं मिला है.
शराब के नशे में हुई हिंसा
मेडिकल जांच में सामने आया है कि घटना के समय सभी आरोपी शराब के नशे में थे. जांच में यह भी पता चला कि घटना से पहले सभी आरोपी सूरज के बेटे के जन्मदिन की पार्टी में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने शराब का सेवन किया था.
मामले में पुलिस का बयान
पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह मामला सीधे तौर पर नस्लीय टिप्पणी का नहीं पाया गया है. पुलिस के अनुसार, आरोपियों के साथ एक युवक मणिपुर का भी मौजूद था और सभी आरोपी आपस में जन्मदिन की पार्टी मना कर मौके पर पहुंचे थे. पुलिस का दावा है कि ग्रुप आपस में ही बातचीत और टिप्पणियां कर रहा था. पास में खड़े एंजेल चकमा और उनके छोटे भाई माइकल को यह लगा कि टिप्पणियां उन पर की जा रही हैं, जिससे विवाद शुरू हुआ और बाद में यह हिंसक झड़प में बदल गया.
एजुकेशन सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस तरह की घटनाओं पर सख्त और ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि छात्रों का भरोसा दोबारा कायम हो सके. वहीं पुलिस प्रशासन का दावा है कि छात्रों की सुरक्षा को लेकर लगातार संवाद किया जा रहा है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
जिस उत्तराखंड में छात्र इलाज और खेती की पढ़ाई का सपना लेकर आते थे, आज वही छात्र अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. सवाल अब सिर्फ पढ़ाई का नहीं, बल्कि इस बात का भी है कि प्रदेश की इकोनॉमी और छात्रों के मन में बैठा डर आखिर कब कम होगा.
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