उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक ने पहले 23 दिसंबर 2025 को प्रोफेसर्स को कुत्तों की गणना करने की जिम्मेदारी सौंपी थी. इस आदेश के वायरल होते ही लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देने लगे. ऐसे में उच्च शिक्षा विभाग ने 2 जनवरी को आदेश में परिवर्तन कर दिया.
उच्च शिक्षा विभाग का अजीबो गरीब फरमान
अगर आपके आस पास कोई भी डिग्री कॉलेज और विश्वविद्यालय है और उस कैम्पस के आस – पास कोई भी कुत्ता घूम रहा है तो इसे भगाने और इस कुत्ते के बारे में जानकारी देने की जिम्मेदारी अब इन प्रोफेसर्स की होगी. क्योंकि उत्तराखंड के उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक ने ये फरमान प्रदेश के सभी उच्च शिक्षा से जुड़े प्राइवेट और सरकारी विश्वविद्यालयों के मुखियामों को ये फरमान सुनाया है. वो भी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए. लेकिन इस फैसले पर एक तरफ पढ़ने लिखने वाले कुछ प्रोफेसर्स जहां सवाल उठा रहे हैं. वहीं कुछ हंसी-खुशी इसे स्वीकार करने को तैयार है.
पहले दी गई थी कुत्तों की गिनती की जिम्मेदारी
दरअसल उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक ने पहले 23 दिसंबर 2025 को प्रोफेसर्स को कुत्तों की गणना करने की जिम्मेदारी सौंपी थी. इस आदेश के वायरल होते ही लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देने लगे. ऐसे में उच्च शिक्षा विभाग ने 2 जनवरी को आदेश में परिवर्तन कर दिया. अब प्रोफेसर कुत्ते गिनेंगे नहीं बल्कि कुत्ते भगाएंगे. तरफ कॉलेज में तैनात प्रशासनिक अधिकारियों को अधिकारिक रूप से इस फरमान का इंतजार है. उनका दावा है कि अगर फरमान आया तो उसे लागू भी किया जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था एक फैसला
दरअसल सुप्रीम कोर्ट में पिछले दिनों एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे. विशेषकर शैक्षणिक संस्थाओं के आस-पास स्ट्रीट डॉग्स के द्वारा डॉग बाइट की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट बेहद गंभीर दिखा. इसके बाद कैंपस और उसके आस-पास आवारा कुत्तों की एंट्री कैसे रोकी जा सके इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रोफेसर्स की जिम्मेदारी तय करने का फैसला लिया गया.
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प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें
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