डिजिटल ट्रेल से फंस गया स्मार्ट फ्रॉडस्टर
कानपुर की एडीसीपी अंजलि विश्वकर्मा के अनुसार, टीम कई हफ्तों से सोनी की डिजिटल गतिविधियों को ट्रैक कर रही थी. दुबई, अमेरिका, मलेशिया सहित कई देशों से उसकी शिकायतें मिली थीं, लेकिन वह लगातार लोकेशन बदलकर बच निकलता था. पुलिस ने उसके मोबाइल की लोकेशन हिस्ट्री, फर्जी नामों पर रजिस्टर्ड ईमेल-आईडी और सबसे अहम एक फूड डिलीवरी ऐप पर सेव पता को ट्रैक किया. इसके बाद टीम ने देहरादून में निगरानी बिठाई. जैसे ही वह ऑर्डर लेने बाहर आया, टीम ने उसे दबोच लिया.
सोनी कैसे करता था कांड?
वह दोगुना पैसा का सपना दिखाकर निवेश खींचता था. सोनी और उसकी कंपनी ब्लूचिप के सेल्स एग्जिक्यूटिव पहले टारगेट परिवारों से संपर्क करते थे. 36 से 46 महीनों में राशि दोगुनी करने का वादा करते और भारत और दुबई में एक साथ कई योजनाओं का चारा डालते थे. मीटिंग कर फाइनेंस एक्सपर्ट की छवि बनाते थे. दिल्ली निवासी अब्दुल करीम की FIR भी इसी मॉडल का खुलासा करती है. उससे भी पहले 9 लाख निवेश करवाया, फिर नई स्कीम बताकर 32 लाख और डलवाए. शिकायतों में सामने आया कि निवेश के बाद उसने कॉल उठाना बंद कर दिया. मीटिंग टालना, आपका पैसा सुरक्षित है जैसे आश्वासन स्क्रिप्ट दोहराना यह उसका तय पैटर्न था.
डिजिटल गायब होने का तरीका
जब निवेशक ज्यादा दबाव डालते तो वह वेबसाइट बंद कर देता. इसके अलावा सोशल मीडिया पेज हटाता, कंपनी के नंबर बंद कर देता और लोकेशन बदल लेता. यही तरीका अब्दुल करीम के परिवार के केस में भी दिखा. कंपनी की वेबसाइट, नंबर, सब अचानक गायब हो गए.
भारत और विदेश में मल्टीपल शेल कंपनियां
पुलिस जांच में सामने आया कि भारत में 3 कंपनियां, ब्लूचिप ग्रुप के तहत 12 सब्सिडियरी कंपनियां, कई खातों में हॉरिजॉन्टल मूवमेंट से पैसा गायब करना, साझेदार और एजेंट भी मैदानी स्तर पर जुड़ते थे. पुलिस ने इनमें से करीब 80 लाख रुपये फ्रीज किए हैं.
पहले भी गिरफ्तार, फिर भी जारी रखी धोखाधड़ी
सोनी 2017 में अलीगढ़ पुलिस द्वारा फ्रॉड केस में पकड़ा जा चुका है. जेल से निकलने के बाद उसने दुबई में निवेशकों को निशाना बनाना शुरू किया. UAE की एक रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ 90 लोगों से ही उसने 17 मिलियन डॉलर (140 करोड़ रुपये से अधिक) जुटा लिए थे.
कैसे टूटा पकड़ से बचने का उसका स्मार्ट सिस्टम?
पुलिस के अनुसार सोनी की एक बड़ी गलती थी. उसने फूड डिलीवरी ऐप में अपना असली पता दर्ज किया हुआ था. लोकेशन लगातार बदलने के बाद भी यह एक स्थायी डिजिटल क्लू था, जिसने पुलिस को उसके दरवाजे तक पहुंचा दिया. अदालत ने उसकी बेल अर्जी ठुकराई दी और अब जांच अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई है. पुलिस यह भी जांच रही है कि वह दुबई से भारत कैसे भागा. क्या किसी अवैध तरीके का इस्तेमाल हुआ.
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