Dehradun News: देहरादून की स्मार्ट सिटी योजनाओं के दावे के बावजूद बंजारावाला क्षेत्र की सड़कों की बदहाली आम जनता के लिए खतरे की घंटी बन गई है. गड्ढों और अधूरी खुदाई के चलते बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग रोजाना हादसों का सामना कर रहे हैं. बारिश में कीचड़ और सूखे में धूल ने यहां के जीवन को कठिन बना दिया है.
देहरादून के बंजारावाला निवासी विकास उनियाल का कहना है कि बंजारावाला की सड़कों की बदहाली का मुख्य कारण अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल का अभाव है. पिछले लगभग 4 सालों से यहां के निवासी धूल और कीचड़ के बीच जीने को मजबूर हैं. सड़कों की खुदाई का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. हम स्कूटी सवार महिलाओं को और स्कूली बच्चों को साइकिल चलाते हुए हादसों का शिकार होते देखते हैं. उन्होंने कहा कि पिछले 4 सालों से यहां के रहने वाले स्थानीय धूल फांकने पर मजबूर है. उन्होंने बताया कि पहले सीवेज लाइन के नाम पर पूरी सड़क को खोदा गया. इसके बाद रही-सही कसर गैस पाइपलाइन बिछाने के काम ने पूरी कर दी. पानी की लाइनों के लिए भी बार-बार खुदाई की जाती है. विभाग अपना काम करते हैं और खुद कर ऐसे ही सड़कों को छोड़ देते हैं. हम अगर शिकायत करते हैं तो हमें एक – दूसरे विभागों के चक्कर कटवाते हैं.
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विडंबना यह है कि एक विभाग अपना काम खत्म कर गड्ढा भरता है, तो दूसरा विभाग उसे फिर से खोद डालता है. इस ‘खोदो और भूल जाओ’ की नीति ने यहाँ की सड़कों को गहरे जख्म दिए हैं, जिनका पिछले 4 सालों से सही से ‘इलाज’ (मरम्मत) नहीं हो पाया है. हम देखते हैं विदेशों में पहले एक काम खत्म होता है तब सड़क का अगला हिस्सा खोदते हैं और पिछले की अच्छे से मरम्मत हो जाती है लेकिन हमारे यहां कोई ऐसी नीति नहीं है.
मौसम चाहे कोई भी हो, मुसीबत कम नहीं होती
विकास उनियाल का कहना है कि मौसम चाहे कोई भी हो लेकिन हमारे मुसीबत कम नहीं होती है.बारिश होते ही ये गड्ढे तालाब का रूप ले लेते हैं. सड़कों पर जमा कीचड़ पैदल चलने वालों और दुपहिया वाहनों के लिए काल बन जाता है, वहीं जब बारिश नहीं होती, तब मुसीबत और बढ़ जाती है. वाहनों के गुजरने पर उड़ने वाली धूल ने लोगों का दम घोंट दिया है. स्थानीय निवासी ‘धूल फांकने’ को मजबूर हैं, जिससे सांस संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है.
हादसों को दावत देती सड़कें
यह केवल असुविधा का मामला नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र अब ‘एक्सीडेंट प्रोन जोन’ बन चुका है. साइकिल से स्कूल जाने वाले बच्चे आए दिन इन गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं. ऊबड़-खाबड़ रास्तों के कारण गाड़ी चलाते समय महिलाएं और बुजुर्ग गंभीर हादसों का शिकार हो चुके हैं. खराब सड़कों के कारण स्थानीय लोगों के वाहनों का मेंटेनेंस खर्च भी कई गुना बढ़ गया है.
बंजारावाला ही नहीं देहरादून की कई सड़कों के हाल बेहाल
देहरादून के बंजारावाला क्षेत्र ही नहीं बल्कि रायपुर, मेंहूवाला, भंडारी बाग आदि कई स्थानों पर सड़कों पर गड्ढों से लोग परेशान हैं. अमन विहार के निवासी अशोक कुमार का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन स्मार्ट सिटी के नाम पर उन्हें केवल नारकीय जीवन मिला है. यदि राजधानी के मुख्य बस अड्डे (ISBT) के पास यह हाल है, तो प्रदेश के दूरस्थ इलाकों की स्थिति की कल्पना करना भी डरावना है. उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे ‘स्मार्ट सिटी’ के सौंदर्यकरण से पहले इन बुनियादी ढांचे की समस्याओं पर ध्यान दें. बंजारावाला की सड़कों को तत्काल पैच वर्क की नहीं, बल्कि पूर्ण पुनर्निर्माण की आवश्यकता है ताकि मासूम बच्चों और आम जनता की जान सुरक्षित रह सके.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें
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