Bhararisain Cow Conservation Centre : भराड़ीसैंण में बनने वाला यह संरक्षण केंद्र केवल पशुपालन परियोजना नहीं, बल्कि पहाड़ की पारंपरिक पहचान, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय पशुपालकों के लिए नई संभावनाओं के द्वार भी खोल सकता है. इस केंद्र के माध्यम से पशुपालकों को प्रशिक्षण और दुग्ध उत्पादन से जुड़े आधुनिक तरीकों के बारे में भी बताया जाएगा. मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने बजट में इस केंद्र की स्थापना का जिक्र किया था. पशुपालन विभाग की योजनाओं के लिए राज्य बजट में भी करोड़ों रुपये का प्रावधान किया गया है.
आई पुरानी याद
पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा का कहना है कि 1970 के दशक में उनके दादा और पूर्व मुख्यमंत्री हेमवंती नंदन बहुगुणा ने भराड़ीसैंण क्षेत्र में विदेशी नस्ल की गायों का एक केंद्र स्थापित किया था, जहां पशुपालकों को प्रशिक्षण और जानकारी दी जाती थी. हालांकि समय के साथ वह केंद्र समाप्त हो गया, लेकिन अब उसी तर्ज पर पहाड़ की अपनी नस्ल बदरी गाय के संरक्षण के लिए नया केंद्र तैयार किया जा रहा है. मंत्री ने बताया कि हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी बजट सत्र के दौरान अपने भाषण में बदरी गाय के संरक्षण और इस केंद्र की स्थापना का जिक्र किया. पशुपालन विभाग की योजनाओं के लिए राज्य बजट में भी करोड़ों रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे नस्ल सुधार, प्रशिक्षण और डेयरी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा.
ये गाय क्यों इतनी खास
बदरी गाय उत्तराखंड की एकमात्र पंजीकृत देशी पहाड़ी नस्ल है, जो कम चारे में भी आसानी से पाली जा सकती है. इसके दूध को औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है और इसमें ए2 प्रकार का प्रोटीन पाया जाता है. यही वजह है कि बदरी गाय के दूध और उससे बनने वाले उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है. हालांकि यह गाय कम मात्रा में दूध देती है, लेकिन इसके दूध से बनने वाला घी काफी महंगा बिकता है. कई जगह बदरी गाय का घी 2500 से 3000 रुपये प्रति किलो तक बाजार में बिक रहा है. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बदरी गाय के संरक्षण और इसके उत्पादों के बेहतर विपणन पर काम किया जाए तो यह पहाड़ के ग्रामीण इलाकों में आय का बड़ा स्रोत बन सकता है.
About the Author
Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.