गौतम ने स्पष्ट कहा कि अंकिता भंडारी की हत्या एक बेहद दुखद घटना थी और इस मामले में दोषियों को सजा मिल चुकी है. सरकार बीते साढ़े तीन वर्षों से लगातार अपनी बात रखती रही है. यदि किसी के पास कोई तथ्य या ठोस सबूत थे तो वे सामने लाए जाते, लेकिन जब ऐसा नहीं हो पाया तो झूठे प्रचार और षड्यंत्र के जरिए पार्टी और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई.
उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें सीएम ने कहा था कि अंकिता के माता-पिता से बातचीत की जाएगी और उनकी इच्छा के अनुरूप कार्रवाई पर विचार किया जाएगा. दुष्यंत गौतम ने कहा कि जिसकी बेटी जाती है, उसका दर्द कभी खत्म नहीं होता. ऐसे में मुख्यमंत्री धामी का यह कहना उनकी संवेदनशीलता और दरियादिली को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि धामी जी हमेशा उत्तराखंड की जनता के दर्द के साथ खड़े रहे हैं, चाहे वह आपदा का समय हो या कोई और संकट. उनकी कार्यशैली जन-जन में सराहनीय रही है.
अपने नाम को एकाएक इस मामले में घसीटे जाने पर दुष्यंत गौतम के आंसू छलक पड़े और उन्होंने गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि लंबे समय बाद अचानक उनका नाम उछालना और ऑडियो-वीडियो क्लिप जारी करना साफ तौर पर एक साजिश का हिस्सा है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला सुरेश राठौर और उनकी तथाकथित पत्नी से जुड़ा हुआ है, जिनके व्यक्तिगत विवाद को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई. गौतम ने कहा कि खुद संबंधित महिला के बयान सामने आ चुके हैं, जिनमें दबाव बनाने की बात कही गई है, जिससे यह षड्यंत्र साफ नजर आता है.
दुष्यंत गौतम ने कहा कि वह संत गुरुदास जी के सिद्धांत को मानते हैं- मन चंगा तो कठौती में गंगा. मन पवित्र हो तो सच्चाई खुद सामने आ जाती है. उन्होंने कहा कि उन्हें इस पूरे मामले में मानसिक पीड़ा हुई है और उनके परिवार को भी इससे गहरा आघात पहुंचा है, लेकिन आखिर उन्होंने न्यायालय की शरण ली.
उन्होंने बताया कि उन्होंने 2 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर किया है और उन्हें पूरा भरोसा है कि न्यायपालिका दोषियों को सजा देने में सफल होगी. गौतम ने कहा कि जिस तरह एक अभियान चलाकर उनके खिलाफ माहौल बनाया गया और धरना-प्रदर्शन किए गए, उससे वह विचलित जरूर हुए, लेकिन उनका आत्मबल मजबूत है.
अंत में दुष्यंत कुमार गौतम ने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद न्यायपालिका से है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिस समय यह पूरा घटनाक्रम बताया जा रहा है, उस दौरान वह उत्तराखंड में मौजूद ही नहीं थे. उन्होंने कहा कि अदालत का ताजा आदेश उनके लिए नैतिक और कानूनी दोनों रूप से बड़ी जीत है और सच्चाई अंततः सामने आएगी.
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