देश में एड्स से होने वाली मौतों में करीब 80 फीसदी तक गिरावट आई है। नए मामलों में भी करीब 48 फीसदी तक गिरावट दर्ज हुई है। प्रमुख मेडिकल संस्थानों के अध्ययन में ये बात सामने आई है।
देश में 2010 के मुकाबले एड्स से होने वाली मौतों में करीब 80 फीसदी की कमी आई है। नए संक्रमण के मामलों में भी 48 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई है। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, एम्स और आईसीएमआर के डॉक्टरों द्वारा की गई इस रिसर्च में ये पता चला है। जांच कराओ और तुरंत इलाज शुरू करो नीति ने एड्स को बड़ी हद तक पीछे धकेला है। सही समय पर इलाज मिलने से संक्रमित लोग अब सामान्य जीवन जी पा रहे हैं।
समय पर इलाज से उम्र बढ़ी
समय पर उपलब्ध दवाओं की मदद से एचआईवी संक्रमित व्यक्ति शादी कर सकता है, बच्चे पैदा कर सकता है और लंबी, स्वस्थ जिंदगी जी सकता है। रिसर्च के मुताबिक, अब देश में ऐसे एचआईवी मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जिनकी उम्र 50 साल से अधिक है। साल 2000 में जहां ऐसे मरीजों की संख्या 17 फीसदी थी, वहीं अब यह बढ़कर 37 फीसदी हो गई है। मां से बच्चे तक एड्स का खतरा करीब शून्य हो गया है। यह इस बात का संकेत है कि इलाज से मरीजों की उम्र बढ़ रही है।
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