छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा के बैलाडीला क्षेत्र से एक बार फिर संवेदनशील और मार्मिक तस्वीरें सामने आई हैं. यहां जब सर्च ऑपरेशन पर निकले District Reserve Guard के जवानों ने प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला की जान बचाने के लिए खुद जिम्मा उठाया. गांव तक न सड़क थी, न रोशनी. एंबुलेंस पहुंचने से इनकार कर चुकी थी. ऐसे समय जब परिजन बेबस थे; तब जवानों ने देवदूत बनकर गर्भवती महिला और उसके बच्चे की जान बचाई. वे आगे आए और मरीज के लिए खाट को स्ट्रेचर बनाया. फिर कंधे पर खाट उठा ली. उबड़-खाबड़ रास्तों और अंधेरे जंगल के बीच कई किलोमीटर पैदल चलकर महिला को सड़क तक पहुंचाया. वहां से एंबुलेंस के जरिए उसे अस्पताल ले जाया गया. समय पर इलाज मिलने से मां और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं. सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों ने लोगों को भावुक कर दिया है. जिन जवानों को अक्सर बंदूक के साथ देखा जाता है, वही यहां जीवन बचाते नजर आए. स्थानीय लोगों ने कहा, वर्दी के पीछे भी एक संवेदनशील दिल धड़कता है.
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले के एक दूरस्थ गांव से मानवता की मिसाल पेश करती तस्वीर सामने आई है. सर्च ऑपरेशन पर निकले DRG जवानों ने गर्भवती महिला को खाट पर लिटाकर कंधों के सहारे कई किलोमीटर पैदल चलकर सड़क तक सुरक्षित पहुंचाया, जहां से उसे अस्पताल भेजा जा सका. महिला के गांव में सड़क नहीं होने से वहां तक एंबुलेंस पहुंच नहीं सकती थी.

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले से मार्मिक तस्वीर सामने आई है. यहां लंबे समय तक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं बड़ी चुनौती रही हैं. कई गांव आज भी सड़क, अस्पताल और एंबुलेंस जैसी सुविधाओं से दूर हैं. ऐसे इलाकों में बीमार और गर्भवती महिलाओं को समय पर इलाज मिल पाना सबसे बड़ी समस्या बन जाता है.

इन्हीं हालात के बीच दंतेवाड़ा के एक दूरस्थ गांव में सर्च ऑपरेशन पर DRG फोर्स के जवान पहुंचे थे. जंगलों से घिरे इस इलाके में जवान नियमित गश्त और सर्चिंग कर रहे थे. तभी गांव में एक आपात स्थिति की खबर ने पूरे अभियान का रुख बदल दिया. नक्सल क्षेत्र में तैनात DRG फोर्स के जवानों ने ड्यूटी के साथ मानव धर्म भी निभाया. गर्भवती महिला को खाट पर उठाकर पगडंडियों से होते हुए सड़क तक लाया गया.
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गांव में मौजूद एक गर्भवती महिला अचानक पीड़ा से तड़प रही थी. घर के आसपास न कोई वाहन था और न ही अस्पताल की सुविधा. परिजन घबराए हुए थे और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि मदद कैसे मिलेगी. वे ईश्वर को याद कर रहे थे. उनको भरोसा था कि ईश्वर ही मदद कर सकते हैं. ऐसे समय उन्होंने तमाम कोशिशें की जो सभी नाकाम हो रही थीं.

हाथ में बंदूक और कंधे पर खाट लिए जवान की यह तस्वीर लोगों के दिलों को छू रही है. नक्सल प्रभावित इलाके में सुरक्षा ड्यूटी निभाते हुए जवानों ने महिला को अस्पताल पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. ग्रामीणों ने जवानों का आभार जताया है. उन्होंने कहा कि हम गांव वाले कभी सोच नहीं सकते थे कि जवान हमारी मदद के लिए राजी हो जाएंगे.

सुरक्षा कारणों से जवानों के हाथ में हथियार भी थे, क्योंकि इलाका संवेदनशील माना जाता है. ड्यूटी और मानवता के बीच संतुलन बनाते हुए वे आगे बढ़ते रहे. गर्भवती महिला की हालत को देखते हुए सभी तेजी से सड़क की ओर बढ़े. कई किलोमीटर पैदल चलने के बाद जवान महिला को उस जगह तक लाए जहां एंबुलेंस इंतजार कर रही थी. ग्रामीणों ने राहत की सांस ली. समय पर अस्पताल पहुंचाने की उम्मीद अब मजबूत हो चुकी थी. खबर है कि महिला और उसका नवजात दोनों स्वस्थ और सुरक्षित हैं.
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