तीसा और कल्हेल क्षेत्र में निजी के बजाय वन भूमि से उखाड़ी जा रही कशमल की जड़ें
धड़ल्ले से हो रहा पीले चंदन के नाम से मशहूर कशमल का दोहन, बाहरी राज्यों में ट्रकों में भेजी जा रहीं
वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी नहीं लगा पा रहे अवैध दोहन पर प्रतिबंध
प्रवीण कुमार
चंबा। तीसा और कल्हेल क्षेत्र में वन भूमि से कशमल की जड़ों का अवैध दोहन चरम पर पहुंच चुका है। दिन के उजाले और रात के अंधेरे में पीले चंदन के नाम से मशहूर कशमल की जड़ें सरकारी और निजी भूमि से उखाड़कर बाहरी राज्यों में बेची जा रही हैं।
इससे ठेकेदार तो मोटी कमाई कर रहे हैं लेकिन वन भूमि को नुकसान पहुंच रहा है। वन विभाग के कर्मचारी भी अवैध तस्करी रोकने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। ठेकेदारों की लेबर सरकारी भूमि से भी इन जड़ों को उखाड़ रही है। इसके वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। ट्रकों में जड़ों को भरकर बाहरी राज्यों में ले जाने वाले चालक भी सोशल मीडिया पर स्टॉक प्लॉट के वीडियो वायरल कर रहे हैं।
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लोग बोले- प्रशासन और वन विभाग दिखाएं गंभीरता
पर्यावरणविद अशोक कुमार, हंसराज, दिनेश कुमार, चैन लाल, सुरेश कुमार, कुलभूषण और प्रेम सिंह ने बताया कि निजी भूमि पर विभाग ने सीमित मात्रा में कशमल की जड़ों को निकालने की अनुमति दी है। रोजाना भरे जा रहे ट्रकों में कहां से इतनी कशमल लाई जा रही है, यह सोचने का विषय है। प्रशासन और वन विभाग को इस मामले में गंभीरता दिखाने की जरूरत है। ठेकेदार मोटी कमाई करने के बाद रफूचक्कर हो जाएंगे लेकिन स्थानीय लोगों को इसकी भरपाई करनी पड़ेगी।
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इस काम आती हैं कशमल की जड़ें
कशमल की जड़ों का प्रयोग गठिया, शुगर सहित अन्य बीमारी की दवाई बनाने के लिए होता है। इसके चलते बाहरी राज्यों की कंपनियों में इनकी काफी मांग है।
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केवल निजी भूमि से कशमल की जड़ों को निकालने की अनुमति दी है। विभागीय कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि जो भी सरकारी भूमि से इन जड़ों को निकालता पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। – राकेश कुमार, मुख्य वन अरण्यपाल
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