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दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग शुरू हो गई है। इस मीटिंग में शशि थरूर भी पहुंचे है। इससे पहले वे कांग्रेस की 2 बड़ी मीटिंग में नहीं गए थे। इंदिरा भवन में चल रही मीटिंग में कांग्रेस शासित राज्यों कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटियों (PCC) के अध्यक्ष भी पहुंचे हैं।
यह बिहार चुनाव में हार के बाद CWC की पहली बैठक है। मीटिंग के एजेंडे के बारे में कहा गया है कि कांग्रेसी नेता जी राम जी बिल पर सरकार के खिलाफ पार्टी के एक्शन प्लान पर चर्चा करेंगे।

विरोध का एक्शन प्लान बनेगा, कर्नाटक CM बदलने पर चर्चा संभव नहीं
कांग्रेस महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 को खत्म करने के खिलाफ सरकार के खिलाफ अपने आंदोलन शुरू करने की रूपरेखा बना सकती है।
कर्नाटक मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि नई दिल्ली में CWC की बैठक में नेतृत्व परिवर्तन पर चर्चा नहीं हो सकती है। यह बैठक सिर्फ देश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए रणनीति बनाने के बारे में है।
कानून का विरोध क्यों हो रहा
UPA-काल के MGNREGA की जगह लेने वाला विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक शीतकालीन सत्र में पारित किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इसे अपनी मंजूरी दे दी है। कांग्रेस ने वाले नए कानून पर आपत्ति जताई है। उसका कहना है कि यह महात्मा गांधी का अपमान है क्योंकि उनका नाम हटा दिया गया है।
नया कानून हर ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वेतन रोजगार की गारंटी देता है, जिसके वयस्क सदस्य बिना किसी कौशल वाले शारीरिक श्रम के लिए तैयार होते हैं।
हालांकि, केंद्रीय योजना के बजाय नया कानून यह प्रावधान करता है कि केंद्र और राज्यों को योजना की फंडिंग 60:40 प्रतिशत के अनुपात में साझा करनी होगी।
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