देवास में रविवार को कांग्रेस पार्टी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदले जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी और मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर यह धरना आयोजित किया गया। कांग्रेस
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार द्वारा मनरेगा योजना का नाम बदलना एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश है। पार्टी का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य देश के एक महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी कानून से महात्मा गांधी के नाम और उनके मूल्यों को धीरे-धीरे हटाना है। कांग्रेस ने इसे महात्मा गांधी की विचारधारा और योगदान का अपमान बताया।
धरने के दौरान कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण जनता को काम का कानूनी अधिकार देने वाला कानून है। पार्टी का आरोप है कि नाम परिवर्तन के जरिए केंद्र सरकार इस अधिकार को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। इसी के विरोध में कांग्रेस ने प्रदेशभर में प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।
इस मौके पर कांग्रेस ग्रामीण जिलाध्यक्ष मनीष चौधरी ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि महात्मा गांधी केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में पूजनीय हैं। उनके नाम से जुड़ी योजना का नाम बदलना कोई विकासात्मक या क्रांतिकारी कदम नहीं कहा जा सकता।
मनीष चौधरी ने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी भी धर्म या नाम से आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं राम भक्त हैं और ‘राम’ के नाम पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि यदि वह किसी नई योजना की शुरुआत करती और उसका नाम रखती, तो यह अधिक उचित और सम्मानजनक होता। उन्होंने कहा कि पहले से चल रही महात्मा गांधी के नाम वाली योजना का नाम बदलना अनावश्यक विवाद को जन्म देने वाला कदम है।
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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