पढ़ाई और खेती को चलाया साथ-साथ
दोनों को साथ लेकर चलने का अमिल का यह प्रयास युवाओं के लिए एक प्रेरणादायी मिसाल है कि मेहनत और लगन से कोई भी काम आसानी से किया जा सकता है.
सरगुजा निवासी अमिल मिंज ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उन्होंने मटर की खेती पिछले साल अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में शुरू की थी. खेत खाली था, तो प्रयोग के तौर पर मटर लगाने का फैसला किया. आज फसल जोरदार स्थिति में है, फूल भरपूर आए हैं और उत्पादन बेहद अच्छा दिख रहा है. अमिल बताते हैं कि तुड़ाई अभी शुरू नहीं हुई है, लेकिन अगले 2 से 5 दिनों में शुरू हो जाएगी.
1 एकड़ में 50–60 क्विंटल उत्पादन का अनुमान जानिए कैसे…
अमिल का कहना है कि इस बार उत्पादन 50–60 क्विंटल तक पहुंच सकता है. मंडियों में इस समय मटर का रेट भी अच्छा चल रहा है, इसलिए उन्हें बेहतर लाभ की उम्मीद है. उन्होंने आधी फसल का अनुमान पहले ही तैयार कर लिया है और कुल 1 एकड़ में खेती की है.
पूरी तरह जैविक खेती, 3 से 4 ट्रैक्टर गोबर की खाद का किया इस्तेमाल
खेती का सबसे खास पहलू यह है कि यह पूरी तरह जैविक है. अमिल ने किसी भी तरह की रासायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं किया है. फसल तैयार करने के दौरान एक एकड़ में करीब 3 से 4 ट्रैक्टर गोबर की खाद मेड बनाते समय डाली गई. इससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर रही और फसल भी मजबूत विकसित हुई.
पढ़ाई और खेती दोनों का संतुलन
अमिल इस समय बीएससी थर्ड सेमेस्टर के छात्र हैं. वे बताते हैं कि घर में खेती का पुराना अनुभव और परिवार का पूर्ण सहयोग उन्हें पढ़ाई और खेती दोनों को साथ लेकर चलने में मदद करता है. सुबह-शाम खेत में समय देते हैं और जरूरत के अनुसार लेबर की भी मदद मिलती रहती है.
ड्रिप सिस्टम से सिंचाई
फसल की सिंचाई के लिए पूरा ड्रिप सिस्टम लगाया गया है. अमिल बताते हैं कि मशीन चालू करते ही पानी अपने आप पौधों तक पहुंच जाता है, जिससे न तो मेहनत ज्यादा लगती है और न ही पानी की बर्बादी होती है. जर्मिनेशन के बाद से लगातार नियमित पानी और देखभाल की जा रही है.
कमाई 2 से 4 लाख तक
अमिल का कहना है कि सबसे खराब हालात में भी 2 से 3 लाख रुपये की आमदनी हो जाएगी. अगर बाजार रेट और उत्पादन दोनों अच्छे रहे तो यह कमाई 4 लाख रुपये तक पहुंच सकती है.
परिवार का मजबूत साथ बढ़ाता है हौसला
अमिल बताते हैं कि घर में सब खेती करते हैं, इसलिए पूरा परिवार उन्हें पढ़ाई और खेती दोनों जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करता है. यही समर्थन उन्हें आगे और बड़े स्तर पर खेती करने का आत्मविश्वास देता है.
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