किशनगंज में ठंड का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते कई दिनों से तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, वहीं बर्फीली पछुआ हवाओं ने शीतलहर को और अधिक तीव्र बना दिया है।
दिन के समय भी ठंड का असर साफ नजर आ रहा है और रातें बेहद कनकनी भरी हो गई हैं। इसका सीधा असर आम जनजीवन पर पड़ रहा है।
सड़कों और बाजारों में पसरा सन्नाटा
ठंड के बढ़ते असर के कारण लोग बेहद जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। सुबह और शाम के समय बाजारों में सन्नाटा पसरा रहता है। आम दिनों की तुलना में सड़कों पर वाहनों की आवाजाही भी काफी कम हो गई है। चौक-चौराहों पर लोग अलाव के सहारे ठंड से राहत पाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।
मौसम विभाग ने बताया ‘कोल्ड डे’ की स्थिति
मौसम विभाग के अनुसार पूरे बिहार में शीतलहर और घने कोहरे का दौर जारी है। किशनगंज सहित उत्तर बिहार के कई जिलों में ‘कोल्ड डे’ की स्थिति बनी हुई है। पिछले 24 घंटों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में अधिकतम तापमान 15 से 23 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया गया।
किशनगंज का अधिकतम तापमान भले ही अन्य जिलों की तुलना में थोड़ा अधिक रहा हो, लेकिन न्यूनतम तापमान में आई गिरावट ने ठंड को और ज्यादा परेशान करने वाला बना दिया है।
गरीब और मजदूर वर्ग पर सबसे ज्यादा असर
ठंड के इस प्रकोप से सबसे ज्यादा प्रभावित गरीब, मजदूर वर्ग और बुजुर्ग हो रहे हैं। रोज कमाने-खाने वाले लोग काम पर निकलने को मजबूर तो हैं, लेकिन ठंड के कारण उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई जगहों पर अलाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से लोग ठंड में ठिठुरते नजर आ रहे हैं।
स्कूलों की टाइमिंग बदली, बच्चों को राहत
तेज ठंड को देखते हुए जिले के कई स्कूलों की समय-सारिणी में बदलाव किया गया है। कई शिक्षण संस्थानों में सुबह की कक्षाएं अब 10 बजे से शुरू की जा रही हैं, ताकि बच्चों को ठंड से बचाया जा सके। अभिभावकों ने भी प्रशासन के इस कदम को राहत भरा बताया है।
अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या
शीतलहर का असर स्वास्थ्य पर भी साफ दिखने लगा है। सदर अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में ठंड से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। अनियंत्रित बीपी, शुगर, सांस लेने में तकलीफ, सर्दी-खांसी और संक्रमण से पीड़ित लोग बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसके अलावा कोल्ड डायरिया, ठंड से अचेत होने, दमा रोगियों में घबराहट, चक्कर आने जैसी शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
चिकित्सकों ने दी सतर्क रहने की सलाह
सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. दत्ता मंडल ने बताया कि ठंड के मौसम में बच्चों और वृद्धों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अत्यधिक ठंड में अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें। थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है। उन्होंने गर्म कपड़े पहनने, शरीर को ढककर रखने और ठंड से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी।
गुनगुने पानी के इस्तेमाल पर जोर
चिकित्सकों ने यह भी सलाह दी कि ठंड के समय अत्यधिक ठंडे पानी के प्रयोग से बचें। अधिक से अधिक गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें, जिससे सर्दी-जुकाम और संक्रमण की आशंका कम हो सके। बुजुर्गों और बच्चों को विशेष ध्यान में रखने की जरूरत है।

अलाव और हीटर बने सहारा
लगातार बढ़ती ठंड ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। सुबह और शाम के समय ठंड से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। लोग ठंड से राहत पाने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं। घरों में हीटर लोगों के लिए सबसे बड़ा सहारा बने हुए हैं। इन दिनों बाजारों में हीटर और गर्म कपड़ों की बिक्री भी बढ़ गई है।
कुछ दिन और जारी रह सकती है ठंड
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पछुआ हवाओं का असर अभी कुछ दिन और बना रह सकता है। ऐसे में ठंड से बचाव के लिए सतर्कता बेहद जरूरी है। शीतलहर ने लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है और राहत के लिए अब सभी को मौसम में बदलाव का इंतजार है।
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