चिशोती आपदा में लापता हुए 31 श्रद्धालुओं के परिजन की डीएनए रिपोर्ट फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला निदेशालय ने वीरवार को संबंधित जांच अधिकारी और शासन को भेज दी है। आपदा के बाद तलाश में कुछ श्रद्धालुओं के अंग ही मिले थे। रिपोर्ट आने से उनकी पहचान हो सकेगी। इससे पीड़ित परिवार अपनों का अंतिम संस्कार कर सकेंगे। पीड़ित परिवारों को सरकार की तरफ से आर्थिक सहायता का रास्ता भी खुल सकेगा।
बीते वर्ष 14 अगस्त को बादल फटने से किश्तवाड़ के चिशोती में चंडी माता मंदिर मार्ग पर 68 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। वहीं 31 श्रद्धालु लापता हो गए थे। कुछ क्षत-विक्षत शव व कटे अंग ही मिले थे जिससे उनकी शिनाख्त नहीं सकी। शिनाख्त के लिए पिछले साल आठ सितंबर को डीएनए जांच के लिए सैंपल लिए गए थे। छह माह तक जम्मू की फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में किट नहीं होने से जांच आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
अमर उजाला ने प्रयोगशाला में किट नहीं होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। 28 जनवरी के अंक में किट आने की खबर भी प्रमुखता से प्रकाशित की थी। किट आने के बाद फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के निदेशक ओम प्रकाश भगत ने 48 घंटे के अंदर डीएनए जांच पूरी होने की उम्मीद जताई थी। वीरवार को उन्होंने देर रात जानकारी दी कि सभी 31 लापता श्रद्धालुओं की डीएनए जांच रिपोर्ट पूरी हो गई है। रिपोर्ट संबंधित मामले के जांच अधिकारी और शासन को भेज दी गई है।