मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को अपने पैतृक गांव कल्याण बिगहा पहुंचकर अपने पैतृक मकान की देखभाल करने वाले सीताराम के श्राद्ध कार्यक्रम में शामिल हुए। 25 दिसंबर को सीताराम का निधन हो गया था। एक जनवरी को जब नीतीश कुमार अपनी मां परमेश्वरी देवी की प
एक हफ्ते में पिता-पुत्र का ये दूसरा दौरा था। सड़क मार्ग से मुख्यमंत्री का काफिला सीधे सीताराम के आवास के पास पहुंचा। सीएम ने सबसे पहले अपने घर की रखवाली करने वाले सीताराम की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने स्वर्गीय सीताराम के परिजनों से बातचीत की और दुख की इस घड़ी में उन्हें धैर्य बंधाया तथा हौसला दिया। इसके बाद नीतीश कुमार अपने पैतृक घर गए और करीब 5 मिनट तक वहां रुके।
75 साल के सीताराम ने 2 महीने पहले ही दैनिक भास्कर से बातचीत में नीतीश कुमार के साथ बचपन की यादें शेयर की थीं।
सबसे पहले जानिए, सीताराम ने नीतीश कुमार के बारे में क्या कहा था?
18 अक्टूबर को सीताराम ने बातचीत में कहा था कि बचपन में 5वीं की पढ़ाई के बाद मुन्ना बाबू (नीतीश कुमार का उपनाम) अधिकतर समय बख्तियारपुर में ही रहते थे। कभी-कभी अपने मां के साथ कल्याण बिगहा आते थे। यहां आने के बाद अपने दोस्तों के साथ गुल्ली-डंडा भी खेलते थे। गांव छोड़िए नीतीश कुमार के शासनकाल में पूरे बिहार में काम हुआ है, विकास के कई काम हुए हैं। नीतीश कुमार काफी ईमानदार हैं, उन्हें हराने वाला कोई पैदा नहीं हुआ है।
‘मैं उनके घर की देखभाल करता था, लेकिन अपने लिए कुछ नहीं मांगा’
बुजुर्ग सीताराम ने बताया था कि मैं उनके घर की देखभाल करता था, लेकिन अपने लिए कुछ नहीं मांगा। जब भी नीतीश आते हैं, पूछते हैं कि क्या सीताराम जी क्या हाल है, इससे ज्यादा मुझे और क्या चाहिए। वे मेरे साथ भी खेलते थे। बचपन से ही नीतीश कुमार समझदार थे। लड़कों के बीच झगड़ा भी होता था, तो उसे नीतीश कुमार समझाते थे, तुरंत सुलह करा देते थे।
‘नीतीश कहीं भी रहें, साल में तीन बार कल्याणबिगहा आना होता ही है’
कल्याणबिगहा के रहने वाले रजनीश कुमार फिलहाल नीतीश कुमार के पैतृक मकान की देखभाल करते हैं। उन्होंने बताया कि 14 मई को नीतीश कुमार की पत्नी मंजू देवी की पुण्यतिथि होती है। उस दिन नीतीश कुमार कहीं भी होते हैं, कल्याणबिगहा जरूर आते हैं। इसके अलावा, 29 नवंबर को उनके पिता वैद्यराज रामलखन सिंह, 1 जनवरी को उनकी मां परमेश्वरी देवी की पुण्यतिथि होती है, इन दोनों दिन भी नीतीश कुमार कल्याणबिगहा आते हैं।
रजनीश बताते हैं कि क्लास 5 तक नीतीश कुमार गांव के ही प्राइमरी स्कूल में पढ़ाई की है। इसके बाद बख्तियारपुर में रहते थे। जब भी पुण्यतिथि में नीतीश कुमार आते हैं, घर में रुकते हैं। वे अपने भाई सतीश से कहते हैं कि आप यहां रहिए, आप रहेंगे तो मैं जरूर आऊंगा।
नीतीश कुमार के गांव में शहर जैसी हर सुविधाएं मौजूद
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पैतृक गांव कल्याण बिगहा में हर वो सुविधाएं मौजूद हैं, जो किसी बड़े शहर, गांव या फिर प्रखंड में होनी चाहिए। गांव में हर दिशा से आने वाले गांवों से पक्की सड़क बनी है, गांव में स्कूल है, अस्पताल है, थाना है। इसके अलावा, शूटिंग रेंज भी है, जहां बच्चों को शूटिंग की ट्रेनिंग दी जाती है। बच्चों के खेलने और बुजुर्गों के टहलने के लिए पार्क भी है। गांव के लोगों की मानें तो ये सुविधाएं नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद ही गांव में आई हैं। उनके मुख्यमंत्री बनने से पहले गांव में सड़कें तो थीं, लेकिन उनमें गड्ढे हुआ करते थे।

कल्याणबिगहा में नीतीश कुमार का पैतृक आवास, जो दो साल पहले पक्का बना है।
गांव ही नहीं पूरे हरनौत प्रखंड में विकास के कई काम
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गांव कल्याणबिगहा नालंदा जिले के हरनौत प्रखंड में आता है। गांव के अलावा, हरनौत प्रखंड में पिछले दो दशकों में विकास के कई काम हुए हैं। लोग बताते हैं कि जब नीतीश कुमार 2005 में पहली बार मुख्यमंत्री बने, तब कल्याणबिगहा किसी भी सामान्य बिहारी गांव की तरह था, कच्ची सड़कें, बरसात में कीचड़ और छोटी नदी (वाहा) को पार करके गांव तक पहुंचने की मजबूरी थी। आज गांव दो-दो फोरलेन सड़कों से जुड़ा हुआ है।
कल्याणबिगहा में अब वे सुविधाएं मौजूद हैं जो कई जिला मुख्यालयों को भी नसीब नहीं हैं। राष्ट्रीय स्तर का शूटिंग रेंज यहां की पहचान बन गया है, जहां देश भर से खिलाड़ी प्रतियोगिताओं में भाग लेने आते हैं। आईटीआई कॉलेज को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का दर्जा मिला हुआ है, जो स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का माध्यम बना है।

कल्याण विभाग के अंतर्गत गांव में संचालित शूटिंग रेंज के प्रभारी उमेश पासवान बताते हैं कि यहां 10 मीटर एयर राइफल, एयर पिस्टल शूटिंग रेंज है। 14 मई 2011 को नीतीश कुमार ने इसका उद्घाटन किया था। आज पूरे बिहार के बच्चे यहां आकर प्रैक्टिस करते हैं। यहां के बच्चे लगभग 150 के आसपास नेशनल खेल चुके हैं और 10 बच्चे इन्टरनेशनल खेल चुके हैं। फिलहाल, 25 मीटर और 50 मीटर का रेंज का ट्रेनिंग सेंटर बनने वाला है।
राज्य स्तरीय +2 उच्च विद्यालय स्मार्ट क्लास जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस है। रेफरल अस्पताल 24×7 चिकित्सा सेवा मुहैया कराता है। आदर्श थाना, पशु चिकित्सा अस्पताल, और बेहतर विद्युत आपूर्ति – ये सभी सुविधाएं गांव को एक आदर्श ग्राम का रूप देती हैं।
गांव में ही नीतीश कुमार ने ‘रामलखन सिंह वाटिका’ बनवाई है, जिसमें उनके पिता स्व.वैधराज रामलखन सिंह, माता परमेश्वरी देवी और दिवंगत पत्नी मंजू सिन्हा की आदमकद प्रतिमाएं स्थापित हैं। पुण्यतिथि के अवसर पर मुख्यमंत्री और उनका परिवार यहां जरूर पहुंचता है।
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