सीएम साय की अध्यक्षता में यह कैबिनेट मीटिंग हुई।
छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण संशोधन विधेयक 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी गई। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए बल प्रयोग, प्रलोभन, कपटपूर्ण साधनों और अनुचित प्रभाव पर प्रभावी रोक लगाना है।
मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में कुल 10 अलग-अलग फैसलों पर मुहर लगी। इनमें परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए नया कानून लाने का भी निर्णय लिया गया। इसके अलावा सरकार ने सोलर और बायोगैस संयंत्रों के लिए 1.50 लाख रुपए का अनुदान तय किया है।
साथ ही छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल का गठन किया जाएगा, जो तकनीकी और गैर-तकनीकी तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा और चयन प्रक्रिया आयोजित करेगा
इस सत्र में पेश हो सकता है धर्मांतरण संशोधन-विधेयक
20 मार्च तक चलने वाले विधानसभा सत्र में धर्मांतरण संशोधन विधेयक भी सदन में पेश हो सकता है। 10 मार्च को कैबिनेट बैठक में इस विधेयक के प्रारुप को मंजूरी मिली। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर विवाद न बढ़े, इसका एक ड्राफ्ट तैयार किया गया है।
इस ड्राफ्ट के अनुसार, किसी एक धर्म से दूसरे धर्म में जाना आसान नहीं होगा। धर्म परिवर्तन केवल पूरी प्रक्रिया और नियम कानून का पालन करने के बाद ही किया जा सकेगा।
नियमों का उल्लंघन करने या जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर जेल के साथ कड़ी सजा का प्रावधान किया जाएगा।
अब जानिए छत्तीसगढ़ में क्यों है कानून की जरूरत ?
छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में खासकर बस्तर, जशपुर, रायगढ़ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आदिवासियों को ईसाई धर्म में लिया जा रहा है। यह विवाद का विषय बना हुआ है। बस्तर के नारायणपुर क्षेत्र में तो यह गुटीय संघर्ष में तब्दील हो चुका है।
धर्मांतरण की प्रक्रिया को मान्यता देने वाला कोई नियम नहीं
छत्तीसगढ़ में वर्तमान में धर्मांतरण की प्रक्रिया को वैधानिक मान्यता देने वाला कोई स्पष्ट नियम नहीं है। अक्सर देखा जाता है कि, लोग किसी अन्य धर्म के अनुयायी की बातों या प्रभाव में आकर उस धर्म को अपनाते हैं। उसकी पूजा-पद्धतियों को मानकर खुद को उस धर्म का अनुयायी घोषित कर देते हैं।
अगर कोई व्यक्ति इस प्रस्तावित नियम के बाहर जाकर धर्म परिवर्तन करता है, तो उसे वैध नहीं माना जाएगा। साथ ही किसी पर दबाव बनाकर या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया जाता है, तो उस व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, गृह विभाग अन्य राज्यों के बनाए गए ऐसे कानूनों का अध्ययन कर रहा है। जिससे छत्तीसगढ़ में भी एक स्पष्ट और मजबूत नियम तैयार किया जा सके।
आदिवासी और धर्म परिवर्तन करने वाले आदिवासियों के बीच कई बार गंभीर विवाद हो चुका है। कानून व्यवस्था बिगड़ चुकी है। इस कारण छत्तीसगढ़ सरकार ने ऐसे विवाद को टालने और धर्मांतरण पर एक कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू की है।

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छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू हो रहा है। 20 मार्च तक चलने वाले सत्र में कुल 15 बैठकें प्रस्तावित हैं। इस सत्र में एक हजार से अधिक प्रश्न लगाए गए हैं। 12 से ज्यादा विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है। इनमें धर्मांतरण संशोधन विधेयक भी सदन में पेश होने की संभावना जताई जा रही है। पढ़ें पूरी खबर…
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